Medanta Hospital: मेदांता में रोबोटिक तकनीक का कमाल; 30 साल के घुटने के दर्द से मिली मुक्ति, 78 वर्षीय बुजुर्ग बिना सहारे के चलने में सक्षम
लखनऊ, 07 जून 2026: चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक रोबोटिक तकनीक के समन्वय ने एक बार फिर एक लाचार मरीज की जिंदगी में खुशियों के रंग भर दिए हैं। लखनऊ के प्रसिद्ध मेदांता हॉस्पिटल (Medanta Hospital) में रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के जरिए 78 वर्षीय बुजुर्ग को न केवल घुटने के असहनीय दर्द से स्थायी मुक्ति मिली है, बल्कि वे अब बिना किसी सहारे के स्वतंत्र रूप से चलने-फिरने में भी पूरी तरह सक्षम हो गए हैं।
यह कामयाबी इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि मरीज पिछले तीन दशकों (30 साल) से इस दर्द को झेल रहे थे और बढ़ती उम्र के साथ उनका चलना-फिरना लगभग बंद हो गया था।
दर्द के कारण गिरे और पैर में हो गया था फ्रैक्चर
यह भावुक और प्रेरणादायक कहानी 78 वर्षीय मिस्टर हरिश्चंद्र नारंग की है। उम्र के बढ़ने के साथ-साथ उनके घुटनों का दर्द इस कदर गंभीर हो गया था कि पिछले दो सालों से उनका सामान्य रूप से चलना भी दूभर हो गया था।
-
गंभीर चोट और निर्भरता: अत्यधिक दर्द और घुटनों की कमजोरी के कारण एक दिन चलते समय वे अचानक गिर गए, जिससे उनके बाएं घुटने के ठीक नीचे की हड्डी (लेग बोन) फ्रैक्चर हो गई। इस गंभीर चोट के बाद मिस्टर नारंग पूरी तरह से बिस्तर पर आ गए और अपनी दैनिक दिनचर्या व आवश्यक कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हो गए।
-
सफल परामर्श: इस संकट की घड़ी में उनके परिजनों ने मेदांता हॉस्पिटल के जॉइंट रिप्लेसमेंट और ऑर्थोपेडिक्स विशेषज्ञ डॉ. सौरव शुक्ला से संपर्क किया। डॉ. शुक्ला ने मरीज की स्थिति की गहन जांच (Evaluation) करने के बाद उन्हें घुटने बदलने (Knee Replacement Surgery) की सलाह दी। शुरुआत में उम्र और जटिलताओं को देखते हुए परिवार में थोड़ा डर था, लेकिन डॉक्टर से काउंसिलिंग और आधुनिक तकनीक के फायदों को समझने के बाद वे सर्जरी के लिए तैयार हो गए।
डॉ. सौरव शुक्ला की मेदांता में '1000वीं सफल सर्जरी' का बना रिकॉर्ड
मिस्टर हरिश्चंद्र नारंग का यह सफल ऑपरेशन मेदांता हॉस्पिटल में डॉ. सौरव शुक्ला के करियर की 1,000वीं सफल सर्जरी के रूप में दर्ज हो गया है। रोबोटिक तकनीक की खूबियों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सौरव शुक्ला ने कहरोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी फायदा इसकी शत-प्रतिशत 'सटीकता' (Precision) है। यह आधुनिक तकनीक हमें सर्जरी से पहले ही मरीज के घुटने या कूल्हे की शारीरिक बनावट (Anatomy) के आधार पर एक व्यक्तिगत और सटीक सर्जिकल प्लान तैयार करने में मदद करती है। इससे कृत्रिम जोड़ बिल्कुल प्राकृतिक रूप से फिट होता है, जिससे मरीज को बेहतर जॉइंट फंक्शन मिलता है और रिकवरी बेहद तेजी से होती है।"
उन्होंने आगे बताया कि हमारा उद्देश्य केवल मरीज का दर्द दूर करना नहीं है, बल्कि उन्हें उस सक्रिय जीवनशैली (Active Lifestyle) में वापस लौटाना है जिसका उन्होंने कभी खुलकर आनंद लिया था।
रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट के चमत्कारी परिणाम
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक ऑपरेशनों की तुलना में रोबोटिक रिप्लेसमेंट के परिणाम मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं:
-
त्वरित गतिशीलता: इस तकनीक से ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद मरीज अत्यधिक आत्मविश्वास के साथ अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं।
-
बिना सहारे के चलना: मरीज बिना किसी लाठी, वॉकर या मानवीय सहारे के स्वतंत्र रूप से चलने और सीढ़ियां चढ़ने में सक्षम हो जाते हैं।
-
कम दर्द और न्यूनतम रक्तस्राव: रोबोटिक कट्स बेहद सटीक होने के कारण नसों और ऊतकों (Tissues) को नुकसान नहीं पहुंचता, जिससे ऑपरेशन के बाद दर्द बहुत कम होता है।
डॉ. सौरव शुक्ला: 11,000 से अधिक सर्जरी का विशाल अनुभव
जोड़ प्रत्यारोपण (Joint Replacement) के क्षेत्र में डॉ. सौरव शुक्ला देश के सबसे विश्वसनीय और अनुभवी चेहरों में से एक हैं:
-
करियर का सफर: उनके पास इस क्षेत्र में 27 से अधिक वर्षों का लंबा अनुभव है, जिसके दौरान वे अब तक 11,000 से अधिक सफल जॉइंट रिप्लेसमेंट ऑपरेशन कर चुके हैं।
-
मेदांता में कीर्तिमान: मेदांता हॉस्पिटल से जुड़ने के बाद से वे 1,200 से अधिक सफल सर्जरी पूरी कर चुके हैं, जिसमें लगभग 750 रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट शामिल हैं। वे रोबोटिक और पारंपरिक (Conventional) दोनों ही पद्धतियों से टोटल नी रिप्लेसमेंट करने में विशेषज्ञता रखते हैं।
इस सफल उपचार के बाद मिस्टर हरिश्चंद्र नारंग और उनका परिवार बेहद खुश है और मेदांता की पूरी मेडिकल टीम के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है।
