Medanta Lucknow: मेदांता लखनऊ ने रचा इतिहास; 400 से अधिक सफल किडनी ट्रांसप्लांट पूरे, महामारी के बीच शुरू हुआ था सफर
लखनऊ डेस्क, आर एल पाण्डेय (16 जून 2026):
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल ने चिकित्सा और अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। किडनी की गंभीर बीमारी से ग्रसित और लंबे समय से डायलिसिस पर निर्भर एक मरीज का सफल प्रत्यारोपण कर मेदांता लखनऊ ने अपना 400वां किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
अस्पताल के किडनी ट्रांसप्लांट कार्यक्रम के लिए यह पड़ाव एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने न केवल एक मरीज को नई जिंदगी दी है, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में मेदांता की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया है।
चुनौतीपूर्ण दौर में शुरू हुआ था सफर; अब तक 419 ट्रांसप्लांट
मेदांता लखनऊ में किडनी ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की शुरुआत 25 जून 2020 को हुई थी। वह समय देश और दुनिया के लिए कोविड-19 महामारी का अत्यंत चुनौतीपूर्ण काल था। इस विपरीत परिस्थिति में शुरू हुए इस कार्यक्रम ने सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए लगातार प्रगति की। इसी का परिणाम है कि जून 2026 तक अस्पताल कुल 419 सफल किडनी ट्रांसप्लांट पूरे कर चुका है।
रोबोटिक तकनीक और हाई-रिस्क मामलों में पाई सफलता
अस्पताल के विशेषज्ञों ने ट्रांसप्लांट सर्जरी के दौरान कई जटिल और उच्च जोखिम (High-Risk) वाले मामलों में भी बेहतरीन सफलता दर दर्ज की है:
-
ABO इनकम्पैटिबल ट्रांसप्लांट: मेदांता ने अब तक 57 ऐसे ट्रांसप्लांट किए हैं, जिनमें डोनर और रिसीवर का ब्लड ग्रुप मैच नहीं कर रहा था (Incompatible)।
-
उम्र का कोई बंधन नहीं: अस्पताल ने 9 वर्ष के मासूम बच्चे से लेकर 65 वर्ष तक के बुजुर्ग मरीजों का सफल प्रत्यारोपण किया है।
-
अंगदाताओं का जज्बा: समाज में अंगदान की मिसाल पेश करते हुए 76 वर्ष तक की आयु के बुजुर्ग अंगदाताओं ने भी अपने प्रियजनों की जान बचाने के लिए किडनी दान की है। इसके अलावा बच्चों में रोबोटिक तकनीक (Robotic-Assisted Surgery) की मदद से भी जटिल ट्रांसप्लांट किए गए हैं।
चिकित्सीय सफलता के पीछे रिश्तों के प्रेम और त्याग की अनूठी कहानी
मेदांता लखनऊ में अब तक हुए कुल प्रत्यारोपणों में सबसे खास बात यह रही कि अधिकांश अंगदान (Organ Donation) परिवार के आंतरिक सदस्यों द्वारा ही किया गया है। यह आंकड़े भारतीय परिवारों के आपसी प्रेम और त्याग की अनोखी दास्तां बयां करते हैं:
-
139 पत्नियों ने अपने पतियों को नया जीवन दिया।
-
130 माताओं और दादियों ने अपने बच्चों की रक्षा के लिए किडनी दान की।
-
42 बहनों और भाभियों के अलावा बड़ी संख्या में पिताओं, भाइयों और बेटियों ने आगे आकर अंगदान किया।
विशेषज्ञ डॉक्टरों का वक्तव्य
"400वां किडनी ट्रांसप्लांट हमारे लिए केवल एक संख्या या आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह हमारे प्रति मरीजों और उनके परिवारों के अटूट भरोसे का प्रतीक है। हर एक सफल सर्जरी किसी व्यक्ति को नया जीवन और उसके पूरे परिवार को एक नई उम्मीद देती है। हमारी टीम जटिल से जटिल मामलों में भी वैश्विक मानकों के अनुरूप सुरक्षित इलाज देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।"
— डॉ. राकेश कपूर (मेडिकल डायरेक्टर एवं डायरेक्टर, यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी)
"किडनी फेलियर से जूझ रहे मरीज जब लंबे समय तक डायलिसिस पर रहते हैं, तो उनका सामान्य जीवन पूरी तरह बाधित हो जाता है। सही समय पर ट्रांसप्लांट उन्हें दोबारा एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जीने की आजादी देता है। 400 से अधिक सफल मामले हमारी अनुभवी टीम, एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। हम इस मौके पर आम जनता से अंगदान के प्रति अधिक जागरूक होने की अपील भी करते हैं।"
— डॉ. राज कुमार शर्मा (डायरेक्टर, नेफ्रोलॉजी)
इस ऐतिहासिक सफलता की मार्गदर्शक टीम
इस पूरे कार्यक्रम को निरंतर सफल बनाने में मेदांता की एक विशाल और बहु-विषयक (Multidisciplinary) टीम ने दिन-रात काम किया है, जिसमें मुख्य रूप से:
-
डॉ. अनीश श्रीवास्तव, डॉ. धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, डॉ. मनमीत सिंह
-
डॉ. रोहित कपूर, डॉ. इमरान अहमद खान, डॉ. मनीष खट्टर और डॉ. नवनीत सौरव
सहित नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एनेस्थीसिया, डायलिसिस, क्रिटिकल केयर, नर्सिंग, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी लैब की पूरी विंग शामिल रही है। आधुनिकतम चिकित्सा तकनीकों से लैस मेदांता लखनऊ का यह ट्रांसप्लांट प्रोग्राम भविष्य में और अधिक जरूरतमंद मरीजों तक विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
