Medical Milestone: मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ में बड़ी कामयाबी; 35 वर्षीय मरीज की रोबोटिक तकनीक (TORS) से टॉन्सिल कैंसर की सफल सर्जरी

Medical Milestone: Major Success at Max Hospital Lucknow; Successful Surgery for Tonsil Cancer on a 35-Year-Old Patient Using Robotic Technology (TORS)
 
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Max Hospital Lucknow Cancer Surgery, 30 May 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कैंसर के इलाज में आधुनिक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए, अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने स्टेज-2 टॉन्सिल कैंसर से पीड़ित एक 35 वर्षीय युवक का ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी (TORS) के जरिए सफल इलाज किया है। इस अत्याधुनिक और मिनिमली इनवेसिव (कम चीर-फाड़ वाली) रोबोटिक प्रक्रिया की मदद से बिना चेहरे पर कोई बाहरी कट लगाए या निशान छोड़े, ट्यूमर को बेहद सटीकता के साथ निकाल दिया गया।

गले के सामान्य दर्द को समझा था इन्फेक्शन, जांच में निकला स्टेज-2 कैंसर

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रहने वाले श्री शकील अहमद पिछले काफी समय से गले में लगातार दर्द और कुछ भी निगलने में होने वाली तीव्र तकलीफ से परेशान थे। शुरुआत में उन्होंने इसे मौसम का सामान्य इन्फेक्शन मानकर अनदेखा कर दिया। हालांकि, जब यह समस्या गंभीर हो गई और उनका खाना-पीना तक दूभर हो गया, तब उन्होंने डॉक्टरों का रुख किया।

मैक्स हॉस्पिटल लखनऊ में जब उनकी गहन जांच और क्लीनिकल मूल्यांकन किया गया, तो डॉक्टरों ने उन्हें स्टेज-2 टॉन्सिल कैंसर होने की पुष्टि की। यह 'हेड एंड नेक कैंसर' (Head and Neck Cancer) का ही एक प्रकार है, जो यदि समय पर ठीक न किया जाए तो मरीज के बोलने और निगलने की क्षमता को हमेशा के लिए प्रभावित कर सकता है।

 दा विंची सर्जिकल सिस्टम और TORS तकनीक का कमाल

इस जटिल केस की कमान मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लखनऊ के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. कमलेश वर्मा और उनकी मल्टीडिसिप्लिनरी ऑन्कोलॉजी टीम ने संभाली। ट्यूमर की स्टेज और उसकी संवेदनशील स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने विश्वस्तरीय 'दा विंची सर्जिकल सिस्टम' (da Vinci Surgical System) की मदद से ट्रांस ओरल रोबोटिक सर्जरी (TORS) करने का निर्णय लिया।

इस प्रक्रिया के तहत गर्दन के लिम्फ नोड्स को एक बेहद छोटे चीरे से साफ किया गया, जबकि मुख्य टॉन्सिल ट्यूमर को रोबोटिक आर्म्स के जरिए मुंह के रास्ते ही बाहर निकाल लिया गया। इस आधुनिक तकनीक के कारण मरीज के चेहरे या गले पर कोई बड़ा या भद्दा निशान नहीं आया।

 "कीमो और रेडिएशन की जरूरत को कम करती है यह तकनीक" - डॉ. कमलेश वर्मा

इस आधुनिक रोबोटिक सर्जरी के फायदों पर बात करते हुए डॉ. कमलेश वर्मा ने कहा टीओआरएस (TORS) तकनीक हेड एंड नेक कैंसर के उपचार में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई है। सही समय पर आने वाले कुछ चुनिंदा मरीजों में इस तकनीक के इस्तेमाल से लंबे समय तक चलने वाली दर्दनाक कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी की आवश्यकता को काफी हद तक कम किया जा सकता है, और कई मामलों में इससे पूरी तरह बचा भी जा सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें चेहरे पर कोई बाहरी कट नहीं लगाना पड़ता, जिससे मरीज मानसिक और शारीरिक रूप से तेजी से रिकवर होकर अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आते हैं।"

इस अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीक के कारण ऑपरेशन के दौरान शरीर के स्वस्थ ऊतकों (Tissues) को न के बराबर नुकसान पहुँचा, जिससे सर्जरी के बाद होने वाला दर्द बेहद कम रहा। श्री अहमद की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और वे मात्र 3 से 4 दिनों के भीतर पूरी तरह स्थिर हो गए। उन्होंने ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद सामान्य रूप से भोजन करना भी शुरू कर दिया।

 युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है हेड एंड नेक कैंसर का खतरा

कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार, टॉन्सिल कैंसर सहित हेड एंड नेक कैंसर अब कम उम्र के युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। इसके मुख्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • तंबाकू, गुटखा और खैनी का सेवन।

  • अत्यधिक धूम्रपान (Smoking) और शराब का सेवन।

  • एचपीवी (Human Papillomavirus - HPV) संक्रमण।

डॉक्टरों की सलाह: यदि आपको लगातार गले में दर्द की शिकायत हो, निगलने में कठिनाई हो रही हो, अचानक आवाज बदल गई हो या गर्दन में बिना किसी दर्द के कोई सूजन या गांठ महसूस हो, तो इसे कतई नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराएं।

मैक्स हॉस्पिटल, लखनऊ, अपनी अत्याधुनिक रोबोटिक कैंसर सर्जरी, विशेषज्ञ सर्जनों की टीम और मरीज केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में गंभीर कैंसर रोगियों को एक नया जीवन और बेहतर परिणाम प्रदान कर रहा है।

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