महाशिवरात्रि पर ध्यान सौ गुना अधिक प्रभावी होता है : महंत विशाल गौड़

Meditation on Mahashivratri is a hundred times more effective – Mahant Vishal Gaur
 
Meditation on Mahashivratri is a hundred times more effective: Mahant Vishal Gaur

लखनऊ। महाशिवरात्रि भारतीयों का प्रमुख आध्यात्मिक पर्व है, जो भगवान शिव की साधना, उपासना और आंतरिक जागरण से जुड़ा हुआ है। इस पावन अवसर पर ध्यान, साधना और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।

लखनऊ स्थित चौक कोतवालेश्वर महादेव मंदिर के महंत विशाल गौड़ ने बताया कि महाशिवरात्रि वह दिन है जब साधना और ध्यान अन्य दिनों की तुलना में सौ गुना अधिक प्रभावी हो जाता है। इस दिन साधक अपनी चेतना में विश्राम करते हैं और दिव्य ऊर्जा से जुड़ते हैं।

महंत ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इसी दिन अग्निलिंग के रूप में शिव प्राकट्य से सृष्टि का आरंभ माना जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। तिथि 15 फरवरी की शाम 05:04 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी की सुबह 05:34 बजे तक रहेगी।

उन्होंने कहा कि शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव का विवाह माता सती और बाद में माता पार्वती से हुआ, इसलिए महाशिवरात्रि का वास्तविक महत्व शिव के प्राकट्य, साधना और उपासना से जुड़ा है। इस दिन व्रत, जागरण और विधि-विधान से जलाभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।

उपवास और जलाभिषेक का महत्व


महाशिवरात्रि पर उपवास को सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान बताया गया है। उपवास मन और शरीर को शुद्ध करता है तथा साधक को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव की उग्रता शांत होती है और वे भक्तों के संकट स्वयं ग्रहण करने का आशीर्वाद देते हैं। जल धीरे-धीरे और श्रद्धा से चढ़ाना चाहिए।

महंत विशाल गौड़ ने यह भी बताया कि इस दिन रात्रि जागरण, ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन अत्यंत आवश्यक है। मांसाहार, शराब, तामसिक भोजन, गपशप और आलस्य से बचना चाहिए। इन नियमों के पालन से आंतरिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

पूजन सामग्री और विधि


महाशिवरात्रि पर गंगाजल या शुद्ध जल, दूध, दही, बेलपत्र, शमी पत्र, भांग, आक, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत, धूप-दीप, कपूर आदि से शिवपूजन किया जाता है। जल अर्पण के लिए तांबे या चांदी के पात्र का प्रयोग श्रेष्ठ माना गया है। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय मंत्र—
“नमः शम्भवाय च मयोभवाय च”
का उच्चारण करना चाहिए।

आध्यात्मिक संदेश


महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। यह पर्व आत्मशुद्धि, साधना और चेतना के विस्तार का अवसर प्रदान करता है। महंत के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक शिवरात्रि व्रत करता है, उस पर भगवान भगवान शिव की विशेष कृपा होती है और जीवन में सुख, शांति व सकारात्मकता का संचार होता है।

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