Meerut Blue Drum Murder Case : सौरभ राजपूत की हत्या में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा

13 महीने की सुनवाई, 127 तारीखें और 22 से अधिक गवाहों के बयान के बाद अदालत का फैसला; मार्च 2025 में सामने आया था सनसनीखेज मामला

 
सौरभ राजपूत की हत्या में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा

मेरठ। उत्तर प्रदेश के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में 14 अक्टूबर 2026 को जिला अदालत ने सजा पर फैसला सुनाते हुए सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया। मर्चेंट नेवी के पूर्व कर्मचारी सौरभ की हत्या और शव को नीले ड्रम में सीमेंट से बंद करने के मामले ने मार्च 2025 में देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुकदमे के दौरान करीब 13 महीने तक सुनवाई चली। इस दौरान 127 तारीखें पड़ीं और 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत दोनों दोषियों को पहले ही दोषी करार दे चुकी थी। सजा सुनाए जाने से पहले बुधवार सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों को अदालत के सामने पेश किया गया। न्यायाधीश ने उनसे पूछा कि क्या वे सजा के संबंध में कुछ कहना चाहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मार्च 2025 में मेरठ में सामने आया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ राजपूत की हत्या में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की भूमिका थी। आरोप था कि हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से बंद कर दिया गया, ताकि अपराध के साक्ष्य छिपाए जा सकें।

सौरभ विदेश में काम करते थे और पत्नी व बेटी के साथ समय बिताने के लिए भारत लौटे थे। मामले से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फरवरी 2025 के आखिरी सप्ताह में मेरठ आने के बाद उनके और मुस्कान के रिश्ते से जुड़े विवाद की बात सामने आई थी। अभियोजन के मुताबिक, इसी पृष्ठभूमि में हत्या की साजिश रची गई।

ऐसे हुआ था हत्याकांड का खुलासा

पुलिस के सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या की गई। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले ड्रम और सीमेंट का इस्तेमाल किया गया। हत्या के बाद मुस्कान के साहिल के साथ हिमाचल प्रदेश जाने की बात भी जांच के दौरान सामने आई थी।

18 मार्च 2025 को सौरभ के भाई राहुल के घर पहुंचने पर संदेह गहराया। घर में साहिल की मौजूदगी और दुर्गंध महसूस होने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। तलाशी के दौरान नीले ड्रम से सौरभ के शव के टुकड़े बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच करते हुए मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया।

अदालत के फैसले पर टिकी निगाहें

जिला अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। भारतीय कानून के तहत मृत्युदंड के मामलों में हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है। दोषियों के पास लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार अपील और अन्य न्यायिक उपायों का विकल्प भी हो सकता है।

मेरठ का यह मामला हत्या और साक्ष्य छिपाने के आरोपों के कारण लंबे समय तक चर्चा में रहा। अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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