मेरठ: सूचना आयुक्त वीरेन्द्र सिंह का बड़ा एक्शन, जनसूचना दबाने वाले अधिशासी अभियंता पर लगाया 25,000/- का जुर्माना
मामला: कोठी पर कब्जा और अवैध विद्युत कनेक्शन
यह पूरा विवाद मेरठ के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित डॉ. मार्गेट नारायण की कोठी से जुड़ा है। डॉ. मार्गेट संयुक्त राष्ट्र (UN) और भारत सरकार में उच्च पदों पर आसीन रही हैं।
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अवैध कब्जा: कोठी की देखरेख के लिए रखे गए नौकरों ने उनके जेठ की मृत्यु के बाद घर पर अवैध कब्जा जमा लिया।
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फर्जी कनेक्शन: आरोप है कि कोरोना काल के दौरान नौकरानी मीनू ने पुराना मीटर हटवाकर अपने नाम से नया विद्युत कनेक्शन करवा लिया।
RTI के जरिए हुआ खुलासे का प्रयास
जब भवनस्वामिनी डॉ. मार्गेट को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने मई 2024 में पावर कॉर्पोरेशन से शिकायत की। कोई संतोषजनक उत्तर न मिलने पर 27 मई 2024 को RTI के जरिए मेरठ विद्युत विभाग से जानकारी मांगी गई। विभाग द्वारा सूचना बाधित करने और गलत धाराओं का हवाला देने पर मामला राज्य सूचना आयोग पहुँचा।
आयोग की कार्यवाही और अधिशासी अभियंता की लापरवाही
सूचना आयुक्त वीरेन्द्र सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिशासी अभियंता महेश कुमार (विद्युत नगरीय वितरण खण्ड-प्रथम, मेरठ) को कई बार समन जारी किए और 'कारण बताओ' नोटिस भेजे।
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अवहेलना: महेश कुमार न तो आयोग के समक्ष उपस्थित हुए और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया।
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अवसर: आयोग ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए 16.10.2025, 23.12.2025 और 25.02.2026 की तारीखें दीं, लेकिन उन्होंने हर बार आदेशों को नजरअंदाज किया।
कठोर दण्ड और वसूली का आदेश
अधिकारी की निरंतर लापरवाही और सूचना छिपाने की मंशा को देखते हुए, आयोग ने 7 अगस्त 2025 को उन पर जुर्माना लगाने का निर्णय लिया था। अंततः 25 फरवरी 2026 को उन्हें सूचना का दोषी करार देते हुए 25,000 रुपये के अर्थदण्ड की वसूली के आदेश जिलाधिकारी, मेरठ को भेज दिए गए हैं।
