भगवान वाल्मीकि मंदिर में गूंजा भक्ति का संदेश, आचार्य सुनील दास ने युवाओं से कहा— शिक्षा अपनाएं, नशे से दूर रहें

A message of devotion resonated at the Bhagwan Valmiki Temple; Acharya Sunil Das urged the youth to embrace education and stay away from substance abuse.
 
fyut

हरियाणा, जुड़ला। भगवान वाल्मीकि मंदिर में गत रात्रि विशाल जागरण का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। इस अवसर पर आचार्य सुनील दास को फूल-मालाएं पहनाकर तथा भगवान वाल्मीकि जी का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने युवाओं को शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हुए नशे से दूर रहने और समाज में प्रेम, एकता एवं भाईचारा बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व सरपंच मेहर सिंह ने ज्योति प्रचंड कर किया। उन्होंने अपने निजी कोष से वाल्मीकि समिति को 21 हजार रुपये की सहयोग राशि भेंट की और अरदास करवाई।

रामायण जीवन जीने की कला और मानवीय मूल्यों की सीख देती है: आचार्य सुनील दास

कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए आचार्य सुनील दास ने कहा कि भगवान वाल्मीकि जी द्वारा रचित रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, मानवीय मूल्यों और आपसी सद्भाव की प्रेरणा देने वाला महाकाव्य है। रामायण हमें सिखाती है कि परिवार और समाज के लोग एकजुट होकर खड़े रहें, तो बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है। वहीं, अपनों का साथ छूट जाने पर शक्ति और विद्वता के बावजूद कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती के लिए आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे को बनाए रखना बेहद जरूरी है। भगवान वाल्मीकि जी की शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा दिखाने और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती हैं।

शिक्षा ही बेहतर भविष्य की नींव

आचार्य सुनील दास ने युवाओं को शिक्षा के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि शिक्षा केवल नौकरी हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और जीवन में आगे बढ़ने की क्षमता प्रदान करती है।

भगवान वाल्मीकि जी की कलम को शिक्षा, ज्ञान और जागरूकता का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज ही सामाजिक बुराइयों को दूर कर बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकता है। इसलिए युवाओं को शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए ज्ञान और अच्छे संस्कारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

नशे से दूर रहकर समाज की प्रगति में योगदान दें युवा

युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए आचार्य सुनील दास ने कहा कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है। नशे के कारण परिवारों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने युवाओं से सकारात्मक सोच अपनाने, अच्छे संस्कारों के साथ जीवन जीने और समाज की उन्नति में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, जागरूकता और नैतिक मूल्यों के माध्यम से ही नशामुक्त एवं सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद

इस अवसर पर वाल्मीकि समिति के प्रधान सतवीर लोट, संजीव कुमार, बलविंदर मास्टर, कमलजीत, रमन, योगेंद्र, बंटी, राकेश सिरसवाल, शिव क्लब के अध्यक्ष रामफल, सतीश वाल्मीकि, राजेश, सुभाष बुम्बक, इंजीनियर सतीश शर्मा और राकेश, अशोक भोरिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ-साथ शिक्षा के प्रचार-प्रसार, सामाजिक एकता, भाईचारे और नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश देने वाला रहा।

Tags