Mindmine Summit: 16वें माइंडमाइन समिट में जुटीं देश की दिग्गज हस्तियां; वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RSS प्रमुख मोहन भागवत ने साझा किए विचार
राजधानी नई दिल्ली में '16वें माइंडमाइन समिट' का अत्यंत भव्य और गरिमामयी आयोजन संपन्न हुआ। देश के इस प्रतिष्ठित विचार मंच (Thought Leadership Forum) में केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मुख्य रूप से शिरकत कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
हीरो एंटरप्राइज (Hero Enterprise) के चेयरमैन सुनील कांत मुंजाल की दूरदर्शी अगुवाई में आयोजित इस दो-दिवसीय समिट में देश के उद्योग, व्यापार, शासन, राजनीति और नीति-निर्माण जगत के सैकड़ों दिग्गजों ने हिस्सा लिया। इस वर्ष इस महत्वपूर्ण वैचारिक मंथन में रियल्टी पार्टनर के रूप में 'हीरो होम्स' का विशेष सहयोग रहा।
तेजी से बदलते वैश्विक माहौल में भारत की भूमिका पर मंथन
इस समिट का मुख्य उद्देश्य आज के अत्यंत गतिशील, अनिश्चित और तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की मजबूत होती स्थिति पर चर्चा करना था। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों के दौरान नीतिगत विचारकों और उद्योगपतियों ने देश की आर्थिक प्राथमिकताओं, आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से रोडमैप तैयार किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के आर्थिक सुधारों और राजकोषीय प्राथमिकताओं पर सरकार का दृष्टिकोण साझा किया।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दिया मुख्य वक्तव्य; बांटे 'बीएमएल मुंजाल अवॉर्ड्स'
समिट के एक विशेष और मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपना मुख्य व्याख्यान (Keynote Address) दिया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में सामूहिक प्रयासों, सांस्कृतिक मूल्यों और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके साथ ही, समाज और उद्योग जगत के विभिन्न क्षेत्रों में अनुकरणीय, साहसिक और उत्कृष्ट योगदान देने वाली देश की महान हस्तियों व संगठनों को इस मंच से प्रतिष्ठित 'बीएमएल मुंजाल अवॉर्ड्स' (BML Munjal Awards) से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार स्वयं सरसंघचालक मोहन भागवत और सुनील कांत मुंजाल द्वारा विजेताओं को प्रदान किए गए।
क्या है माइंडमाइन समिट?
माइंडमाइन समिट भारत के सबसे प्रमुख स्वतंत्र विचार मंचों में से एक है, जहां हर साल देश-विदेश के शीर्ष रणनीतिकार, राजनेता, नौकरशाह और कॉरपोरेट लीडर्स एक छत के नीचे जमा होते हैं। यहाँ होने वाला बौद्धिक संवाद देश के विकास की दिशा तय करने और समकालीन चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
