एमआईटी-डब्ल्यूपीयू ने वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट 2025 का किया सफल समापन

मानव केन्द्रित नवाचार और वैश्विक कनेक्टिविटी पर रहा मुख्य फोकस
 
मानव केन्द्रित नवाचार और वैश्विक कनेक्टिविटी पर रहा मुख्य फोकस
लखनऊ, नवम्बर 2025: एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) द्वारा वर्ल्ड टेक्नोलॉजी (WT) ग्रुप के सहयोग से पुणे स्थित वर्ल्ड पीस डोम में आयोजित ‘वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट 2025 इंडिया (WTS25)’ का सफल समापन हुआ। दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 25 देशों के 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें नीति-निर्माता, शोधकर्ता, उद्योग क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा नवाचारी स्टार्ट-अप लीडर्स शामिल रहे। सम्मेलन का उद्देश्य विज्ञान, तकनीक और नवाचार के माध्यम से एक अधिक जुड़ी हुई, उत्तरदायी और सतत दुनिया का निर्माण करना था।
सम्मेलन में AI, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के उभरते आयामों पर विस्तार से चर्चा हुई। संवाद का फोकस डेटा साइंसेज, अर्थ साइंसेज, लाइफ साइंसेज और इंडस्ट्रियल साइंसेज के वैज्ञानिक संधि बिंदुओं पर रहा।
डब्ल्यूटीएस25 इंडिया कोऑर्डिनेशन कमीशन की चेयर डेबोरा पंडित-सवाफ ने कहा कि “वर्ल्ड पीस डोम वह स्थान है जहाँ विज्ञान, दर्शन और मानव मूल्य एक साथ मिलते हैं। एआई और मशीन लर्निंग के युग में भावनात्मक बुद्धिमत्ता, रचनात्मकता और विवेकपूर्ण निर्णय ही बेहतर भविष्य का रास्ता तय करेंगे। युवा नवप्रवर्तकों के लिए यह उनका ‘moonshot moment’ है।”
इसरो (IISU) के पूर्व निदेशक माधव वासुदेव ढेकणे ने भारत की बढ़ती स्पेस इकॉनमी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दूरदराज़ गांवों तक शैक्षिक टेलीविजन पहुँचाने वाले शुरुआती मिशनों से लेकर चंद्रयान, मंगलयान और आदित्य-एल1 अभियानों तक — भारत ने निरंतर वैज्ञानिक नेतृत्व व सहयोग का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया है। 2040–47 के बीच अंतरिक्ष स्टेशन की योजना ने भारत की अंतरिक्ष वैज्ञानिक क्षमता को नई ऊँचाई दी है।
एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट डॉ. राहुल वी. कराड ने तकनीक और मानव मूल्यों के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि ‘‘वैज्ञानिक प्रगति तभी सार्थक है, जब वह मानवता के हित में उपयोग की जाए। पश्चिम को भारत से अध्यात्म और इमोशनल इंटेलिजेंस सीखने की जरूरत है, और हमें उनसे विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के अनुप्रयोग सीखने चाहिए।’’
सम्मेलन के दौरान डॉ. गणेश काकंदिकर, डॉ. आर.एम. चिटनिस और डॉ. प्रसाद डी. खंडेकर सहित नेतृत्व टीम ने सतत शोध, सामाजिक नवाचार और भविष्य के नैतिक नेतृत्व निर्माण पर विभिन्न पहलों को आगे बढ़ाया।
पहले दिन भारत की पहली ‘कैंपस सर्कुलर इकॉनमी’ पहल — Sustainability Lab with the Kapda Project — का शुभारंभ किया गया, जिसके तहत छात्रों ने कैंपस वेस्ट को उपयोगी उत्पादों में बदलकर तकनीक और नैतिकता को एक साथ जोड़ा। दूसरे दिन युवा वैज्ञानिकों व स्टार्टअप संस्थापकों ने अपने इनोवेशन प्रस्तुत किए और रिसर्च व पॉलिसी एक्टिवेशन के लिए एक नए ग्लोबल हब की शुरुआत हुई।
समिट का समापन इस सामूहिक संदेश के साथ हुआ कि तकनीक को मानवता की सेवा में उपयोग कर वैश्विक कनेक्टिविटी को बढ़ाया जाए और इनोवेशन को अवसर सृजन का माध्यम बनाया जाए, ताकि आने वाले समय में विज्ञान समाज के लिए सकारात्मक परिवर्तन का प्रमुख साधन बन सके।

Tags