एम.एल.के. पी.जी. कॉलेज में शिक्षकों हेतु तनाव प्रबंधन एवं भावनात्मक बुद्धिमत्ता पर प्रोफेशनल डेवलपमेंट कार्यक्रम आयोजित

MLK PG College organised a professional development programme on stress management and emotional intelligence for teachers.
 
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बलरामपुर। एम.एल.के. पी.जी. कॉलेज, बलरामपुर के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा दिनांक 19 जनवरी 2026 को महाविद्यालय सभागार में शिक्षण स्टाफ के लिए “शैक्षणिक जगत में तनाव प्रबंधन एवं भावनात्मक बुद्धिमत्ता” विषय पर एक दिवसीय प्रोफेशनल डेवलपमेंट कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. पूजा मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर, संस्कृत विभाग द्वारा स्वस्तिवाचन के साथ किया गया। इसके उपरांत महाविद्यालय के माननीय प्राचार्य प्रो. जे.पी. पांडेय ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं शिक्षकगण का आत्मीय स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में शिक्षकों के समक्ष अनेक शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं सामाजिक दायित्व होते हैं,

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जिनके कुशल निर्वहन हेतु तनाव प्रबंधन एवं भावनात्मक बुद्धिमत्ता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों को शिक्षकों के मानसिक सशक्तिकरण एवं संस्थागत प्रगति के लिए अनिवार्य बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रबंध सचिव, सेवानिवृत्त कर्नल संजीव कुमार वार्ष्णेय ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने शिक्षकों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच, आत्मसंयम और भावनात्मक संतुलन से ही एक स्वस्थ एवं प्रेरक शैक्षणिक वातावरण का निर्माण संभव है।
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मुख्य नियंता प्रो. वीणा सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता शिक्षकों को अनुशासन, सहानुभूति एवं प्रभावी संवाद की क्षमता प्रदान करती है, जिससे शिक्षण प्रक्रिया और अधिक सुदृढ़ एवं परिणामोन्मुखी बनती है।
आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. एस.पी. मिश्रा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विषय का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि आईक्यूएसी का उद्देश्य केवल शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करना है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. राधिका शर्मा, सहायक प्राध्यापक, मनोविज्ञान विभाग, राजकीय डिग्री कॉलेज, लंगरी गुलर (श्रावस्ती) ने विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए शैक्षणिक क्षेत्र में तनाव के कारणों, उसके दुष्प्रभावों तथा तनाव प्रबंधन की व्यावहारिक तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने भावनात्मक बुद्धिमत्ता को प्रभावी शिक्षण, नेतृत्व क्षमता एवं कार्य–जीवन संतुलन का मूल आधार बताया।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. बी.एल. गुप्ता ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों को आत्मविश्लेषण एवं मानसिक सुदृढ़ता की दिशा में प्रेरित करते हैं। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. पी.के. सिंह, प्रो. रेखा विश्वकर्मा, प्रो. विमल कुमार वर्मा, प्रो. अशोक कुमार, मो. तारिक कबीर, डॉ. दिनेश कुमार मौर्य, डॉ. आशीष लाल, डॉ. रमेश शुक्ला सहित समस्त विभागाध्यक्ष, बड़ी संख्या में शिक्षकगण एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. एस.पी. मिश्रा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. बी.एल. गुप्ता द्वारा किया गया।

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