Monday Shiv Puja Rules: सोमवार को शिव पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना भुगतने पड़ सकते हैं गंभीर परिणाम
Shiv Puja Rules on Monday: हिंदू धर्म में भगवान शिव को 'भोलेनाथ' कहा जाता है, क्योंकि वे अत्यंत दयालु हैं और मात्र एक लोटा शुद्ध जल अर्पित करने से भी प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रों में सोमवार का दिन देवों के देव महादेव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और सच्चे मन से पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि अत्यंत भोले होने के बावजूद शिव पूजा के कुछ बेहद कड़े नियम हैं? अनजाने में की गई छोटी सी लापरवाही या वर्जित चीजों का इस्तेमाल आपकी पूरी पूजा के फल को नष्ट कर सकता है और इससे महादेव रुष्ट भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि सोमवार की शिव पूजा में आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और शिवलिंग पर कौन सी चीजें भूलकर भी नहीं चढ़ानी चाहिए
वलिंग पर कभी न चढ़ाएं हल्दी
आमतौर पर हर देवी-देवता की पूजा में हल्दी का मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है, लेकिन शिव पूजा में हल्दी पूरी तरह वर्जित है। शास्त्रों के अनुसार, हल्दी का संबंध स्त्री सौंदर्य और प्रसाधन से माना गया है, जबकि शिवलिंग को पुरुषत्व और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। इसलिए महादेव को कभी भी हल्दी अर्पित न करें।
केतकी और केवड़े के फूल से दूरी बनाएं
भोलेनाथ को प्रकृति और वनस्पति से अगाध प्रेम है, लेकिन उन्हें सभी फूल पसंद नहीं हैं। शिव जी की पूजा में कनेर, धतूरे के फूल और कमल को छोड़कर लाल रंग के फूल चढ़ाने से बचना चाहिए। विशेषकर केतकी और केवड़े के फूल शिवलिंग पर चढ़ाना सख्त मना है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक झूठ में भागीदार बनने के कारण शिव जी ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से बहिष्कृत कर दिया था। रोली और कुमकुम का न करें प्रयोग
कुमकुम और रोली को सौभाग्य और श्रृंगार का प्रतीक माना जाता है। चूंकि भगवान शिव वैरागी, भस्मधारी और संहार के देवता हैं, इसलिए उनके श्रृंगार या तिलक में कुमकुम व रोली का उपयोग नहीं किया जाता। महादेव के त्रिपुंड के लिए हमेशा चंदन या भस्म का ही प्रयोग करना चाहिए।
शिव पूजन में शंख बजाना और जल देना वर्जित
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा में शंख को अत्यंत पवित्र और अनिवार्य माना गया है, लेकिन शिव जी की पूजा में न तो शंख से जल दिया जाता है और न ही शंख बजाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के एक अत्याचारी असुर का वध किया था, जो भगवान विष्णु का परम भक्त था। शंख उसी असुर का प्रतीक माना जाता है, इसलिए शिव जी की पूजा में इसका प्रयोग वर्जित है।
नारियल पानी से न करें अभिषेक
अक्सर लोग अनजाने में शिवलिंग पर नारियल का पानी चढ़ा देते हैं, जो कि पूरी तरह गलत है। नारियल को साक्षात माता लक्ष्मी का स्वरूप (श्रीफल) माना जाता है, इसलिए इसे भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है। इसके अलावा, शिवलिंग पर चढ़ाई गई कोई भी चीज ग्रहण नहीं की जाती, जबकि नारियल को पूजा के बाद प्रसाद के रूप में बांटना अनिवार्य होता है। यही कारण है कि शिवलिंग पर नारियल पानी नहीं चढ़ाया जाता।
तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) चढ़ाने की भूल न करें
भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है, लेकिन शिव पूजा में इसका इस्तेमाल पाप का भागीदार बना सकता है। कथाओं के अनुसार, महादेव ने जलंधर नामक असुर का संहार किया था। जलंधर की पत्नी वृंदा (जो बाद में तुलसी का पौधा बनीं) ने क्रोधित होकर भगवान शिव को श्राप दिया था कि उनकी पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों का उपयोग नहीं किया जाएगा।
सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ सुथरे वस्त्र (संभव हो तो सफेद या हरे रंग के) पहनें और तांबे के लोटे से शिवलिंग पर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए शुद्ध जल अर्पित करें। नियमों का पालन करते हुए की गई पूजा से महादेव की कृपा आपके पूरे परिवार पर सदैव बनी रहेगी।
