Monsoon Joint Care: बारिश के मौसम में बढ़ रहा है कमर और घुटनों का दर्द, जानें क्यों फिजियोथेरेपी है इसका सबसे प्रभावी समाधान
दर्द निवारक दवाएं नहीं, समस्या की जड़ तक पहुँचना जरूरी
अधिकतर लोग जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द होने पर बिना डॉक्टरी सलाह के केवल दर्द निवारक (Painkillers) गोलियों का सहारा लेते हैं। हालाँकि, दवाइयाँ अस्थायी राहत तो दे देती हैं, लेकिन समस्या के मुख्य कारण को खत्म नहीं कर पातीं।इसके विपरीत, फिजियोथेरेपी वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीके से दर्द के मूल कारण की पहचान कर उसका उपचार करती है। इसमें निम्नलिखित तकनीकों का समावेश होता है
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चिकित्सकीय व्यायाम व स्ट्रेचिंग: मांसपेशियों की जकड़न को दूर करने के लिए।
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स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज: जोड़ों को मजबूती देने और उन पर दबाव कम करने के लिए।
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सही पोस्चर (Posturing): बैठने, उठने और काम करने की सही तकनीकों की जानकारी।
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आधुनिक फिजियोथेरेपी तकनीकें: आवश्यकतानुसार इलेक्ट्रोथेरेपी या अन्य एडवांस्ड तकनीकों का उपयोग।
विशेषज्ञ की राय: समय पर उपचार ही बचाव है
Goel Ayurvedic Medical College and Hospital के विशेषज्ञ डॉ. ओमजी तिवारी के अनुसारबरसात के मौसम में खुद को शारीरिक रूप से सक्रिय रखना, नियमित हल्के व्यायाम करना और दर्द की शुरुआत में ही फिजियोथेरेपी की मदद लेना भविष्य की गंभीर समस्याओं से बचा सकता है।"
कब करें डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क?
यदि आपको निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नज़रअंदाज़ करने के बजाय तुरंत योग्य फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श लें:
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दर्द लगातार एक सप्ताह से अधिक बना रहे।
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चलने-फिरने, उठने-बैठने या सीढ़ियाँ चढ़ने में परेशानी हो।
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हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो।
जनहित में संदेश:
"सक्रिय रहें, सही पोस्चर अपनाएँ और नियमित फिजियोथेरेपी के साथ इस मानसून अपने जोड़ों और मांसपेशियों को पूरी तरह स्वस्थ रखें।"
— डॉ. ओमजी तिवारी (Goel Ayurvedic Medical College and Hospital)
