योगकुलम् के स्थापना दिवस पर सजा ‘योग तरंग महोत्सव’, 100 से अधिक योग शिक्षक और साधक सम्मानित

सिद्ध साधकों का उत्सव’ में योगसेतु डिजिटल मंच का शुभारंभ, योग शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का लिया संकल्प

 
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लखनऊ, 3 नवंबर 2026। योग शिक्षा एवं योग शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान योगकुलम् ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ में भव्य ‘योग तरंग महोत्सव : सिद्ध साधकों का उत्सव’ आयोजित किया। समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए योगकुलम् के पूर्व विद्यार्थियों, योग शिक्षकों और साधकों को योग के माध्यम से समाज में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर 100 से अधिक योग शिक्षकों एवं साधकों को सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय रामकथा वाचक एवं मुख्य अतिथि दिलीप शुक्ला भाईश्री, यूनिवर्सल बुकसेलर्स के चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, उत्तम पौरवाल सहित योगकुलम् के शिक्षक, टीम सदस्य और विभिन्न स्थानों से आए साधक मौजूद रहे। शिक्षकगणों में डॉ. आकांक्षा, ऋतिक गुप्ता, योगी ज्वाला, दीपक, दिव्यांश और डोली देवी सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।

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समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके बाद योगकुलम् के साधकों ने योग प्रस्तुतियां देकर योग, अनुशासन और भारतीय जीवन-मूल्यों का संदेश दिया। इस अवसर पर विकास सिंह राजपूत, अमृता गुप्ता, शिखर मेहरोत्रा, दिशा, राहुल, श्वेता, दिव्या, प्रज्ञा, मीनू, शिखा, नेहा, बीजेंद्र और पुनीत सहित अनेक योग शिक्षक एवं साधक सम्मानित हुए। सम्मानित साधकों में कई ऐसे लोग शामिल हैं, जो अपने योग केंद्र संचालित कर रहे हैं, ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाओं के माध्यम से लोगों को योग सिखा रहे हैं तथा गांवों और स्थानीय समुदायों तक योग का प्रसार कर रहे हैं। इनमें जरूरतमंद लोगों के लिए निःशुल्क योग सत्र आयोजित कर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले साधक भी शामिल हैं।

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समारोह के दौरान साधकों ने अपने संघर्ष, योग से जीवन में आए बदलाव और समाजसेवा से जुड़े अनुभव साझा किए। उनके अनुभवों ने उपस्थित लोगों को भावुक किया और योग को केवल व्यक्तिगत अभ्यास तक सीमित न रखकर सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाने का संदेश दिया।

योगसेतु डिजिटल मंच का शुभारंभ

महोत्सव का प्रमुख आकर्षण ‘योगसेतु’ डिजिटल मंच का आधिकारिक शुभारंभ रहा। योगकुलम् के संस्थापक डॉ. मनीष प्रताप सिंह और मुख्य अतिथि दिलीप शुक्ला भाईश्री ने संयुक्त रूप से इसका शुभारंभ किया। डॉ. मनीष प्रताप सिंह ने बताया कि योगसेतु एक डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से योग सीखने के इच्छुक लोग अपने शहर में सत्यापित योग शिक्षक खोज सकेंगे। लोग अपनी जरूरत साझा कर सीधे योग शिक्षकों से जुड़ सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य योग शिक्षकों को नए अवसर उपलब्ध कराना और लोगों तक विश्वसनीय योग शिक्षा की पहुंच आसान बनाना है।

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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी आकर्षण बढ़ाया। मरुत तिवारी एवं उनकी टीम ने वाद्य संगीत और शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियां दीं। वहीं कथक नृत्य की प्रस्तुतियों ने समारोह को भारतीय सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।योगकुलम् के संस्थापक डॉ. मनीष प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि योग शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं, बल्कि साधक को नियमित अभ्यास, आत्मानुशासन, स्वाध्याय, आत्मनिर्भरता और समाज के प्रति जिम्मेदारी के लिए तैयार करना है। उन्होंने संस्था के मूल सूत्र ‘जागो, जुड़ो, बदलो’ के माध्यम से साधकों को अपनी क्षमताओं के प्रति जागरूक होने, परिवार और समाज से जुड़े रहने तथा योग के ज्ञान को जीवन और सेवा में उतारने का संदेश दिया।

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डॉ. सिंह ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि सफलता प्राप्त करने के बाद भी परिश्रम, सीखने की इच्छा और साधना का क्रम जारी रहना चाहिए। उन्होंने साधकों से आग्रह किया कि वे केवल योग सिखाने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने कार्यों से लोगों के जीवन में स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें।

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समारोह में योगकुलम् ने प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भी अपने विद्यार्थियों और योग शिक्षकों को मार्गदर्शन, मंच, अवसर और सहयोग उपलब्ध कराते रहने की प्रतिबद्धता दोहराई। डॉ. मनीष प्रताप सिंह ने वर्ष 2030 तक एक लाख योग शिक्षक तैयार करने और योग शिक्षा को भारत के घर-घर तक पहुंचाने के संस्थान के संकल्प को भी दोहराया। ‘योग तरंग महोत्सव’ ने योग शिक्षकों और साधकों के योगदान को सम्मान देने के साथ योग शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सेवा के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने का संदेश दिया।

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