स्टडी हॉल के 40 साल के जश्न में 20 स्कूलों के 1,800 से अधिक बच्चों ने लिया हिस्सा
20 स्कूलों के विद्यार्थियों ने किया प्रतिभाग
मेमोरिया 2026 में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS), ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज, जीडी गोयनका, दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, आनंद राम जयपुरिया स्कूल, मॉडर्न एकेडमी, विद्यास्थली, प्रेरणा गर्ल्स स्कूल और प्रेरणा बॉयज स्कूल सहित लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

चार दिनों के दौरान बाल मंच, युवा मंच, ऋतुरंग, दास्तानगोई, नाद ब्रह्म, शार्क टैंक, रिसायकल दिवाज़, टॉक-ए-थॉन और डांस ऑफ डेमोक्रेसी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों ने नृत्य, थिएटर, संगीत, कहानी कथन, कला, खेल, उद्यमिता, पब्लिक स्पीकिंग और लोकतांत्रिक संवाद से जुड़ी गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।


‘हर बच्चे के लिए मंच’ की सोच को आगे बढ़ाता है मेमोरिया
स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन (SHEF) की संस्थापक डॉ. उर्वशी साहनी ने कहा कि स्टडी हॉल के 40 वर्ष पूरे होने का उत्सव लखनऊ के बच्चों की आवाज और उनकी प्रतिभा के साथ शुरू होना उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने कहा कि स्टडी हॉल की शुरुआत उनके गैरेज में सिर्फ छह बच्चों के साथ हुई थी और आज इसका ‘यूनिवर्स ऑफ केयर’ हर बच्चे के लिए खुला है।

उन्होंने कहा कि बच्चे की आर्थिक स्थिति, उम्र, विशेष आवश्यकता, शहर या गांव की पृष्ठभूमि उसकी संभावनाओं की सीमा तय नहीं करती। मेमोरिया इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक बच्चे को भाग लेने, अपनी बात रखने और आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है।

प्रतियोगिता से आगे सीखने का मंच
स्टडी हॉल की प्रिंसिपल श्रीमती मीनाक्षी बहादुर ने कहा कि मेमोरिया का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताओं का आयोजन करना नहीं था। इसका लक्ष्य बच्चों को एक-दूसरे के साथ सीखने, प्रतिभा प्रदर्शित करने, नए विचार साझा करने और अपनी आवाज को पहचानने का अवसर देना था।

उन्होंने कहा कि थिएटर और संगीत से लेकर कला, उद्यमिता और लोकतांत्रिक संवाद तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ने और अपने विचार व्यक्त करने का अवसर मिला। अलग-अलग स्कूलों और पृष्ठभूमियों से आए बच्चों का एक साथ भाग लेना आयोजन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में रहा।

प्रतिभा के साथ संवाद और सहभागिता का संदेश
मेमोरिया 2026 का समापन विद्यार्थियों की प्रतिभा के उत्सव के साथ-साथ इस संदेश के साथ हुआ कि हर बच्चे को ऐसा मंच मिलना चाहिए, जहां वह बिना झिझक भाग ले सके, अपनी बात रख सके और अपनी क्षमताओं को विकसित करते हुए आगे बढ़ सके। चार दिवसीय आयोजन ने बच्चों के बीच रचनात्मकता, सहयोग, अभिव्यक्ति और सहभागिता की भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया।


