3,500 से ज्यादा शो और 25 लाख दर्शक, NMACC ने तीन साल में बनाई अलग पहचान
भारतीय कहानियों को मिला भव्य मंच
NMACC ने भारतीय संस्कृति और कहानियों को आधुनिक मंच तकनीक और बड़े प्रोडक्शन के साथ प्रस्तुत करने पर भी खास जोर दिया है। ‘मुगल-ए-आजम: द म्यूजिकल’, ‘राजाधिराज: लव. लाइफ. लीला’ और NMACC की अपनी
प्रस्तुति ‘द ग्रेट इंडियन म्यूजिकल:
सिविलाइजेशन टू नेशन’ जैसी प्रस्तुतियों ने भारतीय कथाओं को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। वहीं स्टूडियो थिएटर और द क्यूब जैसे मंचों पर हिंदी, मराठी, गुजराती और बंगाली सहित अलग-अलग भाषाओं में थिएटर, संगीत, कॉमेडी और डांस के छोटे तथा प्रयोगात्मक कार्यक्रम भी आयोजित होते रहे हैं।
दुनिया के चर्चित शो भी पहुंचे मुंबई
NMACC की खास पहचान सिर्फ भारतीय प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रही। केंद्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय कई बड़े शो को भारतीय दर्शकों तक पहुंचाया। ‘द साउंड ऑफ म्यूजिक’, ‘वेस्ट साइड स्टोरी’, ‘MAMMA MIA!’, ‘द फैंटम ऑफ द ओपेरा’ और ‘Wicked’ जैसे चर्चित अंतरराष्ट्रीय प्रोडक्शन यहां प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
NMACC की संस्थापक नीता अंबानी की
परिकल्पना का मूल विचार भी भारतीय कला को वैश्विक मंच देना और दुनिया की श्रेष्ठ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को भारत तक लाना रहा है।बड़े मंच से प्रयोगात्मक कला तक की सुविधाएंNMACC की सफलता में उसके आधुनिक और विविधतापूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की भी अहम भूमिका है। यहां 2,000 सीटों वाला ग्रैंड थिएटर, 198 सीटों का स्टूडियो थिएटर, 80 सीटों वाला द क्यूब और चार मंजिला आर्ट हाउस मौजूद है।
इस व्यवस्था के चलते एक ओर बड़े म्यूजिकल और थिएटर प्रोडक्शन के लिए विशाल मंच उपलब्ध है, तो दूसरी ओर छोटे, प्रयोगात्मक और वैकल्पिक कला कार्यक्रमों के लिए भी अलग स्थान मौजूद हैं।
कला सिर्फ मंच और गैलरी तक सीमित नहीं
NMACC परिसर में कला का अनुभव केवल थिएटर या प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक हिस्सों में 56 फुट ऊंचा कमल कुंज, घुंघरुओं से तैयार मुंबई की स्काईलाइन और जापानी कलाकार यायोई कुसामा की ‘Clouds’ जैसी कलाकृतियां भी आकर्षण का केंद्र हैं।
इसके अलावा स्वदेश के माध्यम से भारतीय
कारीगरी और पारंपरिक शिल्प को भी प्रमुखता दी जाती है। इससे आधुनिक कला, वैश्विक रचनात्मकता और भारतीय हस्तशिल्प को एक ही परिसर में देखने का अवसर मिलता है।
वैश्विक मंच पर भारतीय कला की बढ़ती मौजूदगी
NMACC की गतिविधियां अब मुंबई तक सीमित नहीं रह गई हैं। 61वें वेनिस बिएनाले में इंडिया पवेलियन की प्रस्तुति में इसकी भागीदारी भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे बढ़ाने की इसी व्यापक पहल का हिस्सा है।
चौथे वर्ष में भी केंद्र की ओर से कई बड़े कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है। इनमें ‘द ग्रेट इंडियन म्यूजिकल:
सिविलाइजेशन टू नेशन’ की वापसी के साथ-साथ ‘Chicago’ और ऑस्कर-नामांकित संगीतकार मैक्स रिक्टर की भारत में पहली प्रस्तुति जैसी योजनाएं शामिल हैं। NMACC के आधिकारिक अपडेट के अनुसार ‘The Great Indian Musical’ की वापसी नवंबर-दिसंबर 2026 में निर्धारित है।
तीन साल की यात्रा ने बनाई नई सांस्कृतिक पहचान
NMACC के तीन वर्षों के आंकड़े केवल शो और दर्शकों की संख्या नहीं हैं। ये इस बात का संकेत भी हैं कि भारत में आधुनिक सांस्कृतिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुतियों के लिए दर्शकों की मांग लगातार बढ़ रही है।
मुंबई में स्थापित यह केंद्र अब भारतीय परंपरा,
समकालीन रचनात्मकता और अंतरराष्ट्रीय कला को एक ही मंच पर जोड़ने वाले ऐसे सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहां कलाकारों के साथ-साथ दर्शकों को भी भारत और दुनिया की विविध कलाओं का अनुभव एक ही जगह मिल रहा है।
