जीआईटीएम और आईआईएम लखनऊ एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर के बीच एमओयू, ब्लॉकचेन और स्टार्टअप नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

MoU signed between GITM and IIM Lucknow Enterprise Incubation Center; blockchain and startup innovation to get a boost.
 
लखनऊ, 7 अगस्त 2026। गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (जीआईटीएम), लखनऊ ने नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आईआईएम लखनऊ एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर (IIML EIC) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य ब्लॉकचेन तकनीक, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, उद्यमिता, कौशल विकास तथा उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

एमओयू पर जीआईटीएम के निदेशक डॉ. ऋषि अस्थाना और प्रबंधन विभाग (एमबीए) की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति अग्रवाल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर आईआईएम लखनऊ एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी) के प्रोजेक्ट लीड श्री निखिल भट्ट और असिस्टेंट मैनेजर सुश्री साक्षी सचान मौजूद रहे।


एमओयू के बाद 7 अगस्त को संस्थान में “ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी एवं उद्यमिता जागरूकता सत्र” आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को ब्लॉकचेन तकनीक की संभावनाओं, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और उद्यमिता के नए अवसरों से परिचित कराना था।


विशेषज्ञों ने ब्लॉकचेन के बढ़ते औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान को नवाचार और व्यावसायिक सोच के साथ जोड़कर नए स्टार्टअप विकसित करने के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियों में दक्षता हासिल कर युवा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


कार्यक्रम में डॉ. देवेंद्र अग्रवाल (डीन), श्री बृजेश पाण्डेय (एसोसिएट डीन), डॉ. प्रियंका जायसवाल (संयोजक, इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल-IIC) और डॉ. अनीता पाल (आईआईसी समन्वयक) सहित संस्थान के अनेक शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


जीआईटीएम और आईआईएम लखनऊ एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर के बीच यह साझेदारी विद्यार्थियों को ब्लॉकचेन तकनीक, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, कौशल विकास और उद्यमिता के क्षेत्र में व्यावहारिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। संस्थान को उम्मीद है कि इस सहयोग से छात्रों में नवाचार और शोध की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा तथा वे भविष्य की तकनीकी और कारोबारी चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्षम बनेंगे।

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