Myanmar Training Camp Case : 7 विदेशी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल, NIA की चार्जशीट में UAPA धाराएं नहीं
क्या है पूरा मामला?
NIA के अनुसार, आरोपियों पर भारत से म्यांमार में प्रवेश करने और वहां जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, असेंबली और जैमिंग तकनीक से जुड़ी ट्रेनिंग देने की कथित योजना में शामिल होने का आरोप था।अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक मामले की शुरुआत एक ऐसे इनपुट से हुई थी, जिसमें कुछ यूक्रेनी और अमेरिकी नागरिकों के म्यांमार में एक नागरिक विमान पर कथित ड्रोन हमले से संबंध होने की जानकारी का उल्लेख था। NIA ने बाद में अदालत के सामने यह भी दावा किया कि आरोपी म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों के लिए प्रशिक्षण गतिविधियों से जुड़े थे। हालांकि, ये एजेंसी के आरोप हैं और इनका अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना है।
मार्च में हुई थी गिरफ्तारी
मामले में आरोपियों को मार्च 2026 में NIA ने गिरफ्तार किया था। दिल्ली हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, छह यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। FIR में UAPA की धारा 18 लगाई गई थी और बाद में NIA ने जांच के लिए 180 दिन तक की अवधि हासिल की थी।
चार्जशीट में UAPA क्यों नहीं?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सितंबर में सामने आया। 8 सितंबर 2026 को दाखिल पहली चार्जशीट में NIA ने Immigration and Foreigners Act, 2025 की धाराएं लगाईं, लेकिन UAPA की धाराएं शामिल नहीं कीं।हालांकि, NIA की ओर से अदालत को बताया गया कि UAPA से जुड़े पहलुओं की जांच अभी जारी है और आगे की जांच के बाद अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। इसलिए यह कहना कि “UAPA पूरी तरह खत्म या रद्द कर दिया गया” फिलहाल सही नहीं होगा।
डिफॉल्ट बेल कैसे मिली?
इस मामले में जमानत का आधार मुख्य रूप से डिफॉल्ट बेल का कानूनी अधिकार रहा। रिपोर्टों के मुताबिक NIA निर्धारित अवधि के भीतर UAPA से संबंधित आरोपों वाली पूरी चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। 18 सितंबर को अमेरिकी नागरिक Matthew Aaron VanDyke को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने डिफॉल्ट बेल दी। अदालत ने माना कि केवल Immigration कानून के तहत दाखिल की गई चार्जशीट के आधार पर आरोपी के डिफॉल्ट बेल के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता, जबकि UAPA जांच अभी पूरी नहीं हुई थी। इसके बाद छह यूक्रेनी नागरिकों को भी समान आधार पर राहत मिली।
क्या सभी विदेश लौट सकते हैं?
25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली की अदालत ने सातों विदेशी नागरिकों को एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन लौटने की अनुमति दी है। यह अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई है। अदालत के इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि मामला पूरी तरह खत्म हो गया है; NIA की आगे की जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है।इससे पहले छह यूक्रेनी नागरिकों को भी डिफॉल्ट बेल दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक उनके खिलाफ Immigration and Foreigners Act से जुड़े मामले भी FRRO स्तर पर निपटाए गए थे।
मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं
इस पूरे घटनाक्रम को केवल “UAPA हटने से आरोपी बरी हो गए” कहना कानूनी स्थिति को सरल बना देगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार सातों को बरी नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें डिफॉल्ट बेल मिली है। NIA ने UAPA से जुड़े पहलुओं की आगे जांच जारी रखने की बात अदालत में कही है। यानी इस मामले में अभी दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है—एक तरफ अदालत से मिली डिफॉल्ट बेल और विदेश जाने की अस्थायी अनुमति है, जबकि दूसरी तरफ मामले से जुड़ी आगे की जांच का रास्ता खुला हुआ है।
