संकल्प, साधना और सेवा के प्रेरणा-पुंज नरेंद्र मोदी

Narendra Modi: A Beacon of Inspiration for Resolve, Spiritual Endeavour, and Service
 
संकल्प, साधना और सेवा के प्रेरणा-पुंज नरेंद्र मोदी

विष्णु दत्त शर्मा — विभूति फीचर्स

यह एक उल्लेखनीय संयोग है कि विश्वकर्मा जयंती के दिन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस भी आता है। 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी 2026 में 76 वर्ष के हो रहे हैं। उनका जीवन सार्वजनिक सेवा, संगठनात्मक कार्य और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की लंबी यात्रा से जुड़ा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, उनका बचपन वडनगर में बीता और उन्होंने परिवार की चाय की दुकान पर भी काम में हाथ बंटाया।

भारतीय चिंतन में कर्म और निरंतर प्रयास को विशेष महत्व दिया गया है। नरेंद्र मोदी के समर्थक उनके सार्वजनिक जीवन को इसी कर्मप्रधान दृष्टि से देखते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री पद तक की उनकी यात्रा ने भारतीय राजनीति और शासन व्यवस्था में उनकी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

ब्रिक्स के मंच पर भारत की भूमिका

हाल के वर्षों में भारत की विदेश नीति और बहुपक्षीय मंचों पर उसकी सक्रियता नरेंद्र मोदी सरकार के प्रमुख विषयों में रही है। 2026 में भारत ने चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। भारत की अध्यक्षता का विषय ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ रहा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अध्यक्षता के दौरान 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए।

शिखर सम्मेलन के समापन पर नई दिल्ली घोषणा-पत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। सम्मेलन के दौरान वैश्विक शासन, आर्थिक सहयोग, विकास और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श हुआ।

इन घटनाक्रमों को प्रधानमंत्री के समर्थक भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक मंचों पर उसकी भूमिका के विस्तार से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के परिणामों का वास्तविक प्रभाव दीर्घकालिक नीतिगत क्रियान्वयन से ही स्पष्ट होता है।

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अर्थव्यवस्था और व्यापार पर जोर

मोदी सरकार के कार्यकाल में आर्थिक सुधार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नीति के प्रमुख क्षेत्रों में रखा गया है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर 2026 में हस्ताक्षर हुए। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, समझौते में व्यापार के साथ-साथ निवेश और कुशल पेशेवरों के लिए रोजगार एवं वीजा संबंधी प्रावधान भी शामिल हैं।

ऐसे समझौतों की सफलता का वास्तविक आकलन निर्यात, निवेश, रोजगार और घरेलू उद्योग पर उनके दीर्घकालिक प्रभाव से किया जाना होगा। लेखक के दृष्टिकोण से आर्थिक विकास की सार्थकता तभी है, जब उसका लाभ व्यापक स्तर पर नागरिकों, उद्यमियों और युवाओं तक पहुंचे।

गरीब और वंचित वर्गों तक योजनाओं की पहुंच

मोदी सरकार की नीतियों में सामाजिक कल्याण और वित्तीय समावेशन भी प्रमुख विषय रहे हैं। प्रधानमंत्री जनधन योजना के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं का विस्तार, उज्ज्वला योजना के माध्यम से स्वच्छ ईंधन की पहुंच, आयुष्मान भारत के जरिए स्वास्थ्य सुरक्षा, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से आवास तथा किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता जैसे कार्यक्रम इसी व्यापक नीति ढांचे का हिस्सा हैं।

डीबीटी और डिजिटल भुगतान प्रणालियों ने सरकारी सहायता को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था को विस्तार दिया है। इन योजनाओं का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों और लाभार्थी समूहों में अलग-अलग रहा है, लेकिन सामाजिक सुरक्षा और सरकारी सेवाओं की डिजिटल पहुंच पिछले दशक की सार्वजनिक नीति में महत्वपूर्ण विषय बने हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी भी नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में गरीब और वंचित वर्गों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच को प्रमुख प्राथमिकताओं में गिनाती है।

अंतरिक्ष और तकनीकी आत्मनिर्भरता

तकनीकी क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का एक ताजा उदाहरण सितंबर 2026 का GSLV-F17/EOS-05 मिशन है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अनुसार, GSLV-F17 ने EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। ISRO के अनुसार EOS-05 भारत का जियोसिंक्रोनस कक्षा से इमेजिंग करने वाला पहला उपग्रह है। मिशन का प्रक्षेपण 4 सितंबर 2026 को हुआ।

गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और भविष्य की अंतरिक्ष क्षमताओं को लेकर भी भारत लगातार काम कर रहा है। इन प्रयासों का महत्व केवल अंतरिक्ष उपलब्धियों तक सीमित नहीं है; पृथ्वी अवलोकन, संचार, मौसम, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष तकनीक के व्यावहारिक उपयोग भी इसके महत्वपूर्ण पक्ष हैं।

भारत-जापान रक्षा सहयोग

रक्षा क्षेत्र में भारत और जापान के बीच सहयोग का एक उदाहरण ‘एक्सरसाइज वीर गार्जियन-2026’ है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह भारत और जापान की वायु सेनाओं का द्विपक्षीय अभ्यास 9 से 22 सितंबर 2026 तक जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित किया जा रहा है। भारतीय वायुसेना की ओर से तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे विमान तथा जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स की ओर से F-2A लड़ाकू विमान इसमें शामिल हैं।

यह अभ्यास दोनों देशों के बीच परिचालन समन्वय, पेशेवर आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग को बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है। इसे व्यापक भारत-जापान रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा सकता है।

उपलब्धियों का वास्तविक पैमाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक उनके नेतृत्व को आर्थिक विकास, सामाजिक योजनाओं, तकनीकी आत्मनिर्भरता और विदेश नीति में भारत की सक्रिय भूमिका से जोड़ते हैं। वहीं किसी भी सरकार के कार्यकाल का अंतिम मूल्यांकन केवल घोषणाओं या उपलब्धियों की सूची से नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन और नागरिकों के जीवन पर पड़े दीर्घकालिक प्रभाव से किया जाना चाहिए।

आर्थिक वृद्धि का महत्व तब बढ़ता है, जब उससे रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ें। अंतरिक्ष तकनीक का महत्व तब और अधिक होता है, जब उसका उपयोग कृषि, मौसम, संचार और आपदा प्रबंधन में आम नागरिक तक पहुंचे। व्यापार समझौतों का मूल्यांकन निर्यात और निवेश के साथ घरेलू उद्योग तथा रोजगार पर उनके प्रभाव से किया जाना चाहिए। इसी प्रकार सामाजिक योजनाओं की सफलता उनके वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच और परिणामों से निर्धारित होती है।

साधारण परिवेश से सार्वजनिक जीवन तक

नरेंद्र मोदी की जीवन-यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका साधारण पारिवारिक परिवेश है। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, उनका बचपन वडनगर में बीता और परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने चाय की दुकान पर भी काम किया। बाद में वे संगठनात्मक कार्यों से जुड़े और गुजरात के मुख्यमंत्री तथा फिर देश के प्रधानमंत्री बने।

समर्थकों के लिए उनकी यह यात्रा कठिन परिस्थितियों से आगे बढ़ने और सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक सक्रिय रहने की प्रेरक कहानी है। उनके आलोचक और समर्थक, दोनों ही उनके राजनीतिक जीवन और नीतियों का आकलन अलग-अलग दृष्टिकोण से करते हैं; लेकिन यह निर्विवाद तथ्य है कि 2014 से प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण दौर का हिस्सा रहा है।

2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा। तब आज की नीतियों और निर्णयों का मूल्यांकन उनके दीर्घकालिक परिणामों के आधार पर होगा। आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता, सामाजिक सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति—इन सभी क्षेत्रों में लिए गए निर्णय उस भविष्य को प्रभावित करेंगे।

विश्वकर्मा जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस का यह संयोग लेखक के लिए सृजन, श्रम और राष्ट्र-निर्माण के विचारों को जोड़ने का अवसर है। समर्थकों की दृष्टि में नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन संकल्प और सेवा की राजनीति का उदाहरण है। आने वाले वर्षों में इन नीतियों और प्रयासों के परिणाम ही इस दौर की वास्तविक पहचान निर्धारित करेंगे।

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