नारी शक्ति वंदन अधिनियम: राजनीतिक भागीदारी से राष्ट्र निर्माण तक, पीएम मोदी का ऐतिहासिक मिशन
(लेखक: डॉ. राघवेंद्र शर्मा / विनायक फीचर्स)
नई दिल्ली: भारत की विकास यात्रा में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ रहा है, जहाँ राष्ट्र की 'आधी आबादी' अब नीति-निर्धारण की मुख्यधारा का अनिवार्य हिस्सा बनने जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के जिस संकल्प को सिद्ध किया है, वह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक युगांतरकारी घटना है।
2029: भारतीय लोकतंत्र के नए युग का उदय
आगामी 2029 के आम चुनाव से इस अधिनियम को लागू करने की मंशा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान सरकार महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक शक्ति सौंपने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का यह निर्णय उस विश्वास का प्रतीक है कि जब देश की बेटियाँ विधायी प्रक्रियाओं का नेतृत्व करेंगी, तभी भारत एक विकसित राष्ट्र बन सकेगा। यह पहल उस रूढ़िवादी सोच पर सीधा प्रहार है जिसने दशकों तक महिलाओं को निर्णय लेने वाली मेजों से दूर रखा।
संकल्प से सिद्धि तक का सफर
महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों से राजनीति के गलियारों में गूंजता रहा, लेकिन इच्छाशक्ति के अभाव में प्रयास विफल होते रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने सिद्ध कर दिया कि जहाँ दृढ़ संकल्प होता है, वहाँ मार्ग स्वयं प्रशस्त हो जाता है। यह केवल एक चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि पिछले 10 वर्षों में महिला कल्याण के लिए किए गए निरंतर प्रयासों की एक तार्किक परिणति है।
राष्ट्र निर्माण की धुरी: मोदी सरकार की प्रमुख योजनाएं
भाजपा सरकार ने अपने प्रथम दिन से ही महिलाओं को विकास का केंद्र माना है। सशक्तिकरण की इस कड़ी को इन योजनाओं ने मजबूती दी:
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: समाज की मानसिकता बदलकर लिंगानुपात में सुधार किया।
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उज्ज्वला योजना: धुएं से भरे रसोईघर से मुक्ति दिलाकर करोड़ों माताओं को स्वस्थ जीवन दिया।
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सुकन्या समृद्धि योजना: बेटियों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की।
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पीएम मातृ वंदना एवं मिशन इंद्रधनुष: गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण का सुरक्षा चक्र मजबूत किया।
नीति-निर्माण में आएगा नया दृष्टिकोण
हाल ही में देशभर की महिला प्रतिनिधियों के साथ प्रधानमंत्री की बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार महिलाओं की आकांक्षाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इस अधिनियम के लागू होने से न केवल संसद की बनावट बदलेगी, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में एक नया दृष्टिकोण, संवेदनशीलता और समावेशिता आएगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारतीय लोकतंत्र की वह उपलब्धि है, जो देश की बेटियों को विश्वास दिलाती है कि उनके लिए अब कोई भी शिखर अप्राप्य नहीं है। 2029 का चुनाव एक सामान्य निर्वाचन नहीं, बल्कि एक नए युग का उदय होगा जहाँ स्त्रियाँ केवल मतदाता नहीं, बल्कि देश की नियति तय करने वाली नायिकाएँ बनेंगी।
