एसएमएस लखनऊ में राष्ट्रीय सम्मेलन "SPEEDS-2026" का आगाज़: पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण संरक्षण पर जुटे विशेषज्ञ

National Conference "SPEEDS-2026" Kicks Off at SMS Lucknow: Experts Gather to Discuss Mountain Ecosystems and Environmental Conservation
 
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लखनऊ, 27 जून 2026।

राजधानी के प्रतिष्ठित संस्थान स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (SMS), लखनऊ में आज दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "SPEEDS-2026" (सोर्सेस ऑफ़ प्लेनेट एनर्जी, एन्विरोंमेंटल और डिजास्टर साइंस) का भव्य शुभारंभ हुआ। इस वर्ष यह सम्मेलन मुख्य रूप से "पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण एवं मानव जीवन की स्थिरता" जैसे गंभीर और समसामयिक विषय पर केंद्रित है। यह आयोजन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU), लखनऊ और इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), लखनऊ लोकल सेंटर के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है।

दिग्गजों की उपस्थिति में हुआ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन

सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. राजेन्द्र सिंह (वॉटरमैन ऑफ इंडिया), विशिष्ट अतिथि प्रो. (डॉ.) ओंकार सिंह (प्रोफेसर, HBTU कानपुर) और गोबिंद इंडस्ट्रीज के सीएमडी श्री सुशील कुमार अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर मंच पर एसएमएस लखनऊ के निदेशक प्रो. (डॉ.) आशीष भटनागर, महानिदेशक (तकनीकी) एवं सम्मेलन सह-अध्यक्ष डॉ. भरत राज सिंह और एसएमएस के सीईओ व सचिव श्री शरद सिंह भी गरिमामयी उपस्थिति में मंचासीन रहे।

 मुख्य वक्ताओं के विचार और महत्वपूर्ण सुझाव

सम्मेलन के दौरान पर्यावरण, जल सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर देश के जाने-माने विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी:

  • प्रकृति हमारी आध्यात्मिक धरोहर – डॉ. राजेन्द्र सिंह (वॉटरमैन ऑफ इंडिया):

    मुख्य अतिथि डॉ. राजेन्द्र सिंह ने जल संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन में जनभागीदारी को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा, "प्रकृति केवल उपभोग का संसाधन नहीं, बल्कि हमारी आध्यात्मिक धरोहर है। जब तक समाज प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित नहीं करेगा, तब तक पर्यावरणीय समस्याओं का स्थायी समाधान खोजना नामुमकिन है।"

  • तकनीकी नवाचार है जरूरी – प्रो. (डॉ.) ओंकार सिंह:

    उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के पर्यावरणीय संकटों का प्रभावी समाधान केवल आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और सतत विकास के समन्वित प्रयासों से ही निकल सकता है।

  • हरित तकनीक अपनाए उद्योग जगत – श्री सुशील कुमार अग्रवाल:

    औद्योगिक विकास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योगों को आगे बढ़ने के साथ-साथ अपने पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को समझना होगा और 'हरित प्रौद्योगिकियों' (Green Technologies) को अपनाना होगा।

  • बहु-विषयक अनुसंधान की आवश्यकता – डॉ. भरत राज सिंह:

    उन्होंने पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र को मानव कल्याण और जल सुरक्षा का आधार बताते हुए वैश्विक आपदाओं से निपटने के लिए बहु-विषयक (Multi-disciplinary) रिसर्च को बढ़ावा देने की बात कही।

  • संस्थानों का सामाजिक दायित्व – प्रो. (डॉ.) आशीष भटनागर व श्री शरद सिंह:

    निदेशक डॉ. भटनागर ने विषय की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, जबकि सीईओ श्री शरद सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों का कर्तव्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि समाज को नवाचार आधारित व्यावहारिक समाधान देना भी है।

 110 से अधिक शोध-पत्रों में से 81 का हुआ चयन

सम्मेलन के संयोजक डॉ. अरुणेश श्रीवास्तव ने तकनीकी रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों से 110 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए थे। गहन समीक्षा के बाद तकनीकी समिति ने 81 उत्कृष्ट शोध-पत्रों को प्रस्तुतीकरण (Presentation) के लिए चुना है। ये शोध-पत्र ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, जैव विविधता और सतत विकास जैसे समकालीन विषयों पर आधारित हैं।

 इन प्रमुख गणमान्य जनों की रही गरिमामयी उपस्थिति

इस शैक्षणिक महाकुंभ में आईईआई लखनऊ के ई. विजय प्रताप सिंह सहित संस्थान के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, डीन डॉ. पी. के. सिंह, मुख्य महाप्रबंधक श्री सुरेन्द्र श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ गरिमापूर्ण ढंग से हुआ।

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