नेशनल हेराल्ड केस: भ्रष्टाचार के आरोप या राजनीतिक प्रतिशोध?
मनोज कुमार अग्रवाल -विनायक फीचर्स नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्ति के कथित धोखाधड़ी वाले अधिग्रहण के संबंध में एक नई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। आरोपों के अनुसार, लगभग ₹2,000 करोड़ की संपत्ति वाली एजेएल को कथित तौर पर महज ₹50 लाख में अधिग्रहीत कर लिया गया था।
दिल्ली पुलिस की EOW ने दर्ज की FIR
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दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी सहित कुल 9 लोगों और 3 कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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यह नई FIR प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर दर्ज की गई है। ED ने अपनी जांच रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को सौंपी थी, जिसके बाद 3 अक्टूबर को यह प्राथमिकी पंजीकृत हुई।
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FIR में सोनिया गांधी (आरोपी संख्या 1) और राहुल गांधी (आरोपी संख्या 2) के अलावा इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा और सुमन दुबे का नाम शामिल है।
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जिन कंपनियों को आरोपी बनाया गया है, उनमें एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL), यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
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आरोप गंभीर हैं, जिनमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात शामिल हैं।
यंग इंडियन पर धोखाधड़ी का आरोप
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आरोप है कि यंग इंडियन नामक संस्था ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण किया, जिसमें गांधी परिवार की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जाती है।
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कथित रूप से, कोलकाता स्थित तीन फर्जी कंपनियों के माध्यम से यंग इंडियन को ₹1 करोड़ दिए गए थे। इसी फंड का इस्तेमाल करके यंग इंडियन ने मात्र ₹50 लाख में ₹2,000 करोड़ की संपत्ति वाली एजेएल का अधिग्रहण कर लिया।
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ED ने पहले ही इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत ₹752 करोड़ मूल्य की AJL की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने का आदेश दिया था, जिसकी पुष्टि निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) ने कर दी है।
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गौरतलब है कि ED ने 9 अप्रैल, 2025 को सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक चार्जशीट भी दायर की थी।
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इससे पहले, आयकर विभाग ने 2017 में यंग इंडियन के हाथों एजेएल की संपत्तियों के अवैध अधिग्रहण पर ₹414 करोड़ से अधिक की बड़ी टैक्स चोरी पाई थी।
कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया
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यह मामला पहली बार 2014 में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत पर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा संज्ञान में लिया गया था। गांधी परिवार ने निचली अदालत के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
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कांग्रेस पार्टी लंबे समय से इन आरोपों को खारिज करती आ रही है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की सत्ताधारी भाजपा सरकार राजनीतिक प्रतिशोध के तहत केंद्रीय एजेंसियों (ED, EOW) का इस्तेमाल कर गांधी परिवार को परेशान कर रही है।
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भाजपा इसे कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार का खुला भ्रष्टाचार बताती रही है।
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राजनीतिक गलियारों में ताजा FIR से हड़कंप मचा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नेशनल हेराल्ड मामले के आगे बढ़ने पर राहुल गांधी को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी छोड़ना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि सरकार विपक्ष पर दबाव बनाने और संसद में अपने एजेंडे को प्रभावी बनाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है।

