राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026: आरजीआईपीटी ने प्रदर्शित कीं सतत विकास और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ तकनीकें

National Technology Day 2026: RGIPT showcases sustainable development and 'waste to wealth' technologies
 
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Rajiv Gandhi Institute of Petroleum Technology ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 के अवसर पर नवाचार, सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखते हुए कई अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। संस्थान परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा आसपास के विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान संस्थान ने जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, कार्बन प्रबंधन और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ आधारित तकनीकों को प्रस्तुत किया। इन प्रदर्शनों के माध्यम से यह दिखाया गया कि विज्ञान और इंजीनियरिंग के नवाचार समाज और पर्यावरण से जुड़ी वास्तविक समस्याओं के समाधान में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

तकनीक केवल विचार नहीं, व्यवहारिक समाधान: प्रो. हिरानी

संस्थान के निदेशक Harish Hirani ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आरजीआईपीटी में विकसित की जा रही तकनीकें केवल प्रयोगशाला तक सीमित अवधारणाएं नहीं हैं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगी और प्रभावी समाधान हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान का लक्ष्य ऐसी प्रौद्योगिकियां विकसित करना है जो विश्वसनीय, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल हों।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक तकनीकी विकास का उद्देश्य केवल नवाचार नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी होना चाहिए।

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जल संरक्षण और सीवेज प्रबंधन पर विशेष फोकस

प्रो. हिरानी ने बताया कि संस्थान ने सीवेज जल शुद्धिकरण, जल पुनर्चक्रण और भूजल पुनर्भरण के लिए एकीकृत जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की है। उपचारित पानी का उपयोग परिसर में बागवानी, सिंचाई, फव्वारों और सेल्फी पॉइंट जैसे सौंदर्यीकरण कार्यों में किया जा रहा है।

उन्होंने “लिविंग लैब” मॉडल का भी उल्लेख किया, जिसके तहत वास्तविक पर्यावरणीय चुनौतियों को शिक्षण और शोध के माध्यम से व्यावहारिक समाधान में बदला जा रहा है।

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बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर पर शोध

कार्यक्रम में संस्थान की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की भी जानकारी दी गई। निदेशक ने बताया कि आरजीआईपीटी ने बायोगैस उत्पादन क्षमता में वृद्धि की है और इसे एलपीजी के विकल्प के रूप में उपयोगी बनाया जा रहा है।

इसके अलावा:

  • बायोगैस अपशिष्ट से बायोचार तैयार किया जा रहा है
  • कार्बन डाइऑक्साइड कैप्चर तकनीक पर काम जारी है
  • जल विभाजन तकनीक के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन पर शोध हो रहा है

उन्होंने कहा कि भविष्य में हाइड्रोजन स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।

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प्लास्टिक कचरे से उपयोगी उत्पाद तैयार

आरजीआईपीटी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। संस्थान द्वारा:

  • प्लास्टिक पृथक्करण
  • वेस्ट श्रेडिंग
  • प्लास्टिक-टू-क्रूड ऑयल तकनीक
    पर कार्य किया जा रहा है।

इसके साथ ही अपशिष्ट प्लास्टिक से ब्लॉक, स्टूल और अन्य उपयोगी उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं।

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नए M.Sc. कार्यक्रमों की घोषणा

प्रो. हिरानी ने बताया कि संस्थान जल्द ही:

  • सस्टेनेबल एनर्जी साइंसेज
  • जियोसाइंसेज

में नए M.Sc. कार्यक्रम शुरू करेगा। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन तकनीक और पेट्रोलियम विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करना है।

बिना GATE के भी मिलेगा PhD में प्रवेश

संस्थान ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में भी बदलाव की घोषणा की है। अब छात्र संस्थान-स्तरीय परीक्षा के माध्यम से भी पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। योग्य उम्मीदवार बिना GATE योग्यता के भी आवेदन कर सकेंगे और चयनित छात्रों को फेलोशिप सुविधा दी जाएगी।

ChatGPT जैसे टूल्स पर संतुलित उपयोग की सलाह

प्रो. हिरानी ने डिजिटल तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ChatGPT जैसे उपकरण सीखने और उत्पादकता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन तकनीकी शिक्षा और शोध में मौलिक सोच तथा प्रयोगधर्मिता का महत्व हमेशा बना रहेगा।

छात्रों के लिए आकर्षण का केंद्र बने प्रदर्शन

कार्यक्रम में आयोजित इंटरैक्टिव प्रदर्शनों ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। इन मॉडलों के माध्यम से दिखाया गया कि विज्ञान और इंजीनियरिंग की मदद से जल संरक्षण, ऊर्जा उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी चुनौतियों का समाधान संभव है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का यह आयोजन नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक रूप से उपयोगी शोध के प्रति आरजीआईपीटी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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