तनावपूर्ण जीवनशैली में प्राकृतिक उपचार बन रहा स्वास्थ्य-संतुलन का सशक्त माध्यम : डॉ. शिखा गुप्ता
लखनऊ। आधुनिक जीवनशैली की तेज़ रफ्तार और बढ़ते तनाव ने लोगों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है। लंबे समय तक कार्यालयों में काम करने, अनियमित दिनचर्या और तनावपूर्ण वातावरण के कारण अनिद्रा, थकान, मानसिक तनाव, शारीरिक जकड़न तथा ऊर्जा की कमी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में प्राकृतिक चिकित्सा और रिलैक्सेशन थेरेपी स्वास्थ्य संतुलन बनाए रखने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही हैं।
लखनऊ के आशियाना सेक्टर-एच स्थित हेल्थ इज़ वेल्थ होलिस्टिक सेंटर की डायरेक्टर एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. शिखा गुप्ता ने बताया कि मानव शरीर एक मशीन की तरह कार्य करता है, जिसे समय-समय पर विश्राम और पुनर्संतुलन की आवश्यकता होती है। प्रकृति आधारित उपचार पद्धतियां शरीर की स्वाभाविक उपचार क्षमता को सक्रिय कर स्वास्थ्य सुधार में मदद करती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति सप्ताह में कम से कम एक दिन अपने शरीर और मन को पुनर्जीवित करने के लिए समर्पित करे, तो वह तनाव, थकान और जीवनशैली से जुड़ी कई समस्याओं से राहत पा सकता है।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, सेंटर में हाइड्रोथैरेपी, मड स्पा, मड थैरेपी, रिलैक्सेशन थैरेपी, शिरोधारा और मसाज थैरेपी जैसी प्राकृतिक एवं पुनर्स्थापनात्मक उपचार पद्धतियों के माध्यम से शरीर और मन को गहन विश्राम प्रदान किया जाता है। लगभग एक से डेढ़ घंटे के विशेष सत्रों में पूरे शरीर के रिलैक्सेशन और रिनोवेशन पर कार्य किया जाता है, जिससे विभिन्न अंगों की कार्यक्षमता बेहतर होती है, मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति स्वयं को अधिक ऊर्जावान महसूस करता है।
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और जीवनशैली के समग्र संतुलन पर कार्य करती है। नियमित रूप से ऐसे सत्र लेने से तनाव कम होता है, नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है, मांसपेशियों को आराम मिलता है तथा संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है।
डॉ. शिखा गुप्ता ने लोगों से अपील की कि वे अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय स्वयं के लिए निकालें और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों को अपनाकर स्वस्थ, संतुलित एवं आनंदपूर्ण जीवन की दिशा में कदम बढ़ाएं।
