जातीय उन्माद और नफरत फैलाने वालों के विरुद्ध अभियान की आवश्यकता

There is a need for a campaign against those who spread ethnic hatred and fanaticism.
 
जातीय उन्माद और नफरत फैलाने वालों के विरुद्ध अभियान की आवश्यकता
बिना ठोस आधार अथवा स्पष्ट आरोप के किसी संभ्रांत व्यक्ति को जेल भेज दिया जाना कार्यपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ग्वालियर के अधिवक्ता श्री अनिल मिश्रा की गिरफ़्तारी और तत्पश्चात रिहाई का प्रकरण इसी तथ्य का प्रत्यक्ष उदाहरण है। यह कहना अनुचित नहीं होगा कि देश को जातीय उन्माद और नफरत की आग में झोंकने का प्रयास करने वाले तत्वों के विरुद्ध कानून सम्मत और प्रभावी अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है।

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दलित राजनीति की आड़ में कुछ तत्वों द्वारा समय-समय पर मनुस्मृति तथा अन्य हिंदू धर्मग्रंथों का अपमान एवं दहन किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अब समय आ गया है कि ऐसे कृत्यों पर कठोर अंकुश लगाया जाए। यदि समय रहते इन तत्वों को दंडित नहीं किया गया, तो देश में सामाजिक वैमनस्य और अराजकता को बढ़ावा मिलने से रोका नहीं जा सकेगा।

नफरत की राजनीति के अंतर्गत दलित बनाम सवर्ण के कृत्रिम संघर्ष को हवा देने के प्रयास में अधिवक्ता अनिल मिश्रा को बिना ठोस साक्ष्य के गिरफ़्तार किए जाने का षड्यंत्र जिस प्रकार उजागर हुआ है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि कानून का दुरुपयोग अधिक समय तक नहीं चल सकता।

यह प्रश्न भी गंभीर विचार का विषय है कि क्या किसी फ़रार अभियुक्त की रिपोर्ट मात्र के आधार पर किसी बुद्धिजीवी या अधिवक्ता को गिरफ़्तार किया जा सकता है। अंततः मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा अनिल मिश्रा की गिरफ़्तारी को अवैध ठहराया जाना उन सभी षड्यंत्रों पर करारा प्रहार है, जो जातीय संकीर्णता के नाम पर समाज में अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे थे।

इस निर्णय से न केवल अराजक तत्वों के मंसूबे ध्वस्त हुए, बल्कि पुलिस-प्रशासन और न्याय व्यवस्था के प्रति आमजन का विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है। यह स्पष्ट संदेश गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून के दायरे से बाहर जाकर किसी को प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।

अब आवश्यकता इस बात की है कि समाज में नफरत और विद्वेष फैलाने, तथा धार्मिक ग्रंथों का अपमान कर सामाजिक सौहार्द को क्षति पहुंचाने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए, ताकि देश में शांति, सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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