सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण को 'दंडनीय अपराध' घोषित करना समय की मांग

Declaring encroachment on public thoroughfares a 'punishable offense' is the need of the hour.
 
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एक स्वस्थ लोकतंत्र की बुनियाद 'जियो और जीने दो' के सिद्धांत पर टिकी होती है। लेकिन दुर्भाग्यवश, आधुनिक समाज में नागरिक अपने कर्तव्यों को भूलकर अधिकारों का दुरुपयोग करने में आगे दिख रहे हैं। इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है—सार्वजनिक मार्गों और स्थलों पर बढ़ता अतिक्रमण। छोटी गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक, अतिक्रमण की समस्या अब एक लाइलाज बीमारी बनती जा रही है।

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अतिक्रमण: एक अघोषित 'मौलिक अधिकार'?

नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों की शिथिलता के कारण आज आम नागरिक ने अपने घर के सामने की दो-तीन फीट सड़क घेरने को अपना 'मौलिक अधिकार' समझ लिया है। नालियों पर पक्का निर्माण करना और सड़कों को संकरा करना अब आम बात हो गई है।

  • अस्थाई अतिक्रमण: पारिवारिक उत्सवों के नाम पर मुख्य मार्गों पर टेंट गाड़ देना।

  • स्थाई अतिक्रमण: धार्मिक स्थलों या ऊँची चहारदीवारी के नाम पर सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करना।

प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक संरक्षण

अतिक्रमण हटाने के अभियान अक्सर 'ऊँट के मुँह में जीरे' के समान साबित होते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

  1. राजनीतिक हस्तक्षेप: जब भी प्रशासन सख्ती दिखाता है, स्थानीय जनप्रतिनिधि वोट बैंक की राजनीति के कारण अतिक्रमणकारियों के पक्ष में खड़े हो जाते हैं।

  2. अधिकारियों की लापरवाही: पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी से दबंगों के हौसले बुलंद रहते हैं।

  3. कानून का डर न होना: वर्तमान में अतिक्रमण के विरुद्ध ठोस दंडात्मक कार्रवाई का अभाव है।

समाधान: सख्त कानून और जन-जागरूकता

आवास विकास और प्राधिकरणों द्वारा नियोजित कॉलोनियों में भी धार्मिक या व्यक्तिगत आधार पर सड़कों को घेरा जा रहा है। ऐसे में आम आदमी स्वयं को असहाय पाता है। इस विकराल समस्या के समाधान के लिए निम्नलिखित कदम उठाने अनिवार्य हैं:

"सार्वजनिक मार्गों पर किसी भी प्रकार के आयोजन या निर्माण द्वारा सड़क घेरना पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए।"

  • दंडनीय अपराध: अतिक्रमण को केवल 'अवैध' नहीं, बल्कि 'दंडनीय अपराध' की श्रेणी में रखा जाए, जिसमें भारी जुर्माने के साथ कारावास का प्रावधान हो।

  • त्वरित कार्रवाई: किसी भी संपर्क मार्ग या सार्वजनिक स्थल पर अतिक्रमण की सूचना मिलते ही उसे तत्काल हटाने की पारदर्शी व्यवस्था हो।

  • जवाबदेही तय हो: जिस क्षेत्र में अतिक्रमण हो, वहां के संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

सड़कों पर अतिक्रमण न केवल यातायात को बाधित करता है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं (जैसे एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड) के लिए भी काल बन जाता है। यदि हमें अपने शहरों को रहने योग्य और व्यवस्थित बनाना है, तो अतिक्रमण के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनानी होगी।

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