नेपाल के नए सीमा नियमों से ठप हुआ व्यापार, सीमावर्ती जिलों में संकट गहराया
रोजमर्रा के व्यापार पर सबसे ज्यादा असर
प्रेस वार्ता में गीता गुप्ता ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से रोटी-बेटी का संबंध रहा है। सीमावर्ती इलाकों में दैनिक उपयोग की वस्तुओं का पारंपरिक व्यापार होता रहा है, लेकिन अब सख्त नियमों के चलते छोटे व्यापारियों को ‘स्मगलिंग’ के संदेह में परेशान किया जा रहा है।
हजारों व्यापारियों की आजीविका पर असर
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के बहराइच, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जैसे जिलों के साथ-साथ बिहार और उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में लगभग 50 हजार से अधिक छोटे व्यापारी प्रभावित हुए हैं। इससे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय नागरिक भी हो रहे परेशान
सीमा पर सख्ती का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है। सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दोनों देशों के बीच आवाजाही करते हैं, लेकिन अब उन्हें जांच के नाम पर घंटों रोका जा रहा है और सामान की मात्रा पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इससे सामाजिक संबंधों पर भी असर पड़ रहा है।
केंद्र सरकार से तीन अहम मांगें
व्यापार मंडल की ओर से केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
- नेपाल के साथ उच्चस्तरीय वार्ता कर छोटे व्यापारियों को राहत दी जाए
- सीमा पर स्पष्ट SOP जारी कर मनमानी रोकी जाए
- व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए 24x7 हेल्पलाइन शुरू की जाए
पीएम और विदेश मंत्री को सौंपा पत्र
इस मुद्दे को लेकर गीता गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर कूटनीतिक स्तर पर समाधान की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल की पारंपरिक मित्रता पूरी दुनिया के लिए उदाहरण रही है और छोटे व्यापारियों की समस्याओं का समाधान कर इस रिश्ते को और मजबूत किया जाना चाहिए।
सबसे ज्यादा प्रभावित वस्तुएं
खाद्यान्न: दाल, चावल, आटा, गेहूं, चना, तेल, घी, नमक, चीनी, मसाले, चाय पत्ती, बिस्किट
घरेलू उपयोग: साबुन, सर्फ, नील, सफाई सामग्री, टूथपेस्ट, टूथब्रश, माचिस, मोमबत्ती, टॉर्च, बैटरी
स्वास्थ्य व पूजा: दवाइयाँ, पट्टी-दवा, अगरबत्ती, धूप
अन्य: स्टेशनरी, कॉपी-किताब, खिलौने, रेडीमेड कपड़े, चप्पल-जूते, साइकिल-बाइक पार्ट्स
सीमा नियमों में अचानक बदलाव से सीमावर्ती अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। अब नजर केंद्र और नेपाल सरकार के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है, जिससे हजारों छोटे व्यापारियों को राहत मिल सके।
