भारत में विदेशी शिक्षा का नया अध्याय: UWA ने शुरू की मुंबई और चेन्नई कैंपस के लिए आवेदन प्रक्रिया

A New Chapter in Foreign Education in India: UWA Launches Application Process for Mumbai and Chennai Campuses
 
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मुंबई | 21 अप्रैल 2026: भारत के अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। द यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया (UWA) ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय विस्तार के तहत भारत में अपने दो नए परिसरों—मुंबई और चेन्नई—के लिए प्रवेश प्रक्रिया (Admission Process) शुरू करने की घोषणा की है। इस कदम के साथ ही UWA भारत में एक साथ दो कैंपस स्थापित करने वाला दुनिया का पहला विदेशी विश्वविद्यालय बन गया है।

भविष्य के पाठ्यक्रम: AI से लेकर बिजनेस मैनेजमेंट तक

UWA के भारतीय परिसरों में छात्रों को उन विषयों की शिक्षा दी जाएगी जिनकी वैश्विक बाजारों में भारी मांग है। प्रमुख पाठ्यक्रमों में शामिल हैं:

  • टेक्नोलॉजी: कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस।

  • बिजनेस: बिजनेस मैनेजमेंट और प्रोफेशनल MBA।

इन पाठ्यक्रमों को उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं (Industry-Relevant) के अनुसार डिजाइन किया गया है, जिससे छात्रों को न केवल डिग्री मिलेगी बल्कि वे वैश्विक फैकल्टी और एक्सचेंज प्रोग्राम्स के जरिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी हासिल कर सकेंगे।

कब से शुरू होंगे कैंपस?

  • मुंबई कैंपस (अंधेरी): यहाँ शैक्षणिक सत्र सितंबर 2026 से शुरू होगा।

  • चेन्नई कैंपस: इस परिसर में कक्षाएं मार्च 2027 से संचालित की जाएंगी।

कुलपति का विजन: "देश में ही मिलेगी विश्वस्तरीय शिक्षा"

यूडब्ल्यूए के कुलपति अमित चकमा ने इस अवसर पर खुशी जाहिर करते हुए कहा भारत में हमारे परिसरों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। हम चाहते हैं कि भारतीय छात्र अपने देश की मिट्टी पर रहकर ही विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करें। हमारा उद्देश्य उद्योगों के साथ मिलकर एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है, जो छात्रों को केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए व्यावहारिक रूप से तैयार करे।"

छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

अब तक अंतरराष्ट्रीय डिग्री के लिए छात्रों को विदेश जाना पड़ता था, जो काफी खर्चीला और चुनौतीपूर्ण होता था। UWA की इस पहल से अब भारतीय छात्र कम खर्च में अंतरराष्ट्रीय स्तर की फैकल्टी, रिसर्च सुविधाएं और ग्लोबल नेटवर्किंग का लाभ अपने ही देश में उठा सकेंगे। यह पहल भारत को एक ग्लोबल एजुकेशन हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

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