शिक्षा का नया दौर: किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर AI और सर्वांगीण विकास पर जैन यूनिवर्सिटी का फोकस
360-डिग्री विकास: केवल पुस्तकीय ज्ञान अब पर्याप्त नहीं
रवि भूषण ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में छात्रों की सफलता के लिए 'सर्वांगीण विकास' (Holistic Development) अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में अब पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ तीन मुख्य स्तंभों पर काम किया जा रहा है:
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एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियाँ: खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों की छिपी हुई प्रतिभा को मंच प्रदान करना।
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व्यक्तित्व विकास (Personality Development): छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाना और 'सॉफ्ट स्किल्स' पर विशेष ध्यान देना।
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व्यावहारिक ज्ञान: किताबी सिद्धांतों को वास्तविक कार्यक्षेत्र (Practical Application) में लागू करने का प्रशिक्षण।
AI और आधुनिक तकनीक का समावेश
बदलते वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए रवि भूषण ने कहा कि आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है। उन्होंने कहा तकनीक में हो रहे तीव्र बदलावों को देखते हुए हमने अपने पाठ्यक्रम में AI और अन्य आधुनिक विषयों को शामिल करने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए छात्रों का नई तकनीकों से लैस होना अनिवार्य है।"
गुणवत्ता और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता
संस्थान की कमियों को स्वीकार करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ कॉलेजों में शिक्षा का स्तर अभी मानकों के अनुरूप नहीं है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि संस्थान इन कमियों को दूर करने के लिए निरंतर सुधार और 'अपग्रेडेशन' की दिशा में कार्य कर रहा है।
बेहतर कॉरपोरेट संस्कृति का निर्माण
जैन यूनिवर्सिटी के विजन को स्पष्ट करते हुए रवि भूषण ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।
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लक्ष्य: ऐसे पेशेवर तैयार करना जो न केवल कार्यकुशल हों, बल्कि बेहतर कॉरपोरेट कल्चर और नैतिक मूल्यों के वाहक भी बनें।
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नेतृत्व क्षमता: विश्वविद्यालय प्रशासन और कॉलेज मिलकर एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं जहाँ छात्रों में नेतृत्व (Leadership) की क्षमता विकसित हो सके।
