उत्तर प्रदेश में नील (इंडिगो) की खेती का नया युग: एएमए हर्बल और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के बीच ऐतिहासिक समझौता
लखनऊ, 7 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश के कृषि परिदृश्य में एक बड़े बदलाव की नींव रखी गई है। प्रदेश में इंडिगो (नील) की खेती को पुनर्जीवित करने और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एएमए हर्बल समूह (AMA Herbal Group) और लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी (Integral University) ने एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी 'शिक्षा और व्यापार' (Education and Industry) के मेल से प्रदेश के कृषि क्षेत्र को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है।
साझेदारी का मुख्य उद्देश्य
इस एमओयू का प्राथमिक लक्ष्य इंडिगो को उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख नकदी फसल (Cash Crop) के रूप में स्थापित करना है। इस पहल के माध्यम से न केवल पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
सहयोग के मुख्य बिंदु:
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वैज्ञानिक अनुसंधान: इंटीग्रल यूनिवर्सिटी का कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान इंडिगो की वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीजों के विकास और तकनीक पर काम करेगा।
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प्रशिक्षण एवं कौशल: विश्वविद्यालय किसानों को बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
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बाजार की उपलब्धता: एएमए हर्बल समूह किसानों द्वारा उत्पादित फसल की खरीद सुनिश्चित करेगा और इसे वैश्विक बाजार से जोड़ने की जिम्मेदारी उठाएगा।
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उद्योग-अकादमिक तालमेल: यह समझौता छात्रों के लिए व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
जब शैक्षणिक संस्थान की विशेषज्ञता और उद्योग का व्यावसायिक दृष्टिकोण एक साथ मिलते हैं, तो एक नई ऊर्जा (Synergy) का जन्म होता है। यह पहल न केवल छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करेगी बल्कि भारत सरकार के आत्मनिर्भर कृषि के विजन को भी मजबूती देगी।" — डॉ. यावर अली शाह, को-फाउंडर व सीईओ, एएमए हर्बल समूह
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जावेद मुसर्रत, कुलसचिव श्री हारिस सिद्दीकी, और एएमए हर्बल के सीईओ डॉ. यावर अली शाह सहित कई दिग्गज मौजूद रहे। कृषि विभाग की प्रमुख प्रो. सबा सिद्दीकी और जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. वजा-उल-हक ने तकनीकी पहलुओं पर जोर दिया। इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रो-वाइस चांसलर डॉ. निदा फातिमा और डॉ. नदीम अख्तर के विशेष सहयोग की सराहना की गई।
टिकाऊ खेती की ओर कदम
यह एमओयू उत्तर प्रदेश में 'सतत और लाभकारी कृषि' (Sustainable Farming) की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। नील की खेती से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है, जो इसे पर्यावरण और किसान दोनों के लिए एक 'विन-विन' (Win-Win) सौदा बनाती है।
