उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की नई पहल, निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक में वेबसाइट लॉन्च, किसानों-निर्यातकों के बीच हुए एमओयू
 
उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की नई पहल, निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के कृषि एवं औद्यानिक उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने और कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन तथा निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की दूसरी बैठक में निर्यात प्रक्रिया को आसान बनाने, किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की जानकारी उपलब्ध कराने और निर्यातकों तथा एफपीओ के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में प्रदेश के सभी 75 जिलों से किसानों, निर्यातकों और एफपीओ ने भाग लिया। इस दौरान निर्यातकों और एफपीओ के बीच कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए, जिससे किसानों की उपज को सीधे बड़े बाजारों से जोड़ने की दिशा में नई संभावनाएं बनी हैं।

किसानों को एक क्लिक पर मिलेगी निर्यात की जानकारी

उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने इस अवसर पर नई वेबसाइट का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि वेबसाइट के माध्यम से किसानों और निर्यातकों को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस जिले की कौन-सी कृषि एवं औद्यानिक उपज किस देश में निर्यात की जा सकती है, संबंधित देश में उत्पाद के लिए कौन-कौन से गुणवत्ता मानक आवश्यक हैं तथा निर्यात के लिए किन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

इस डिजिटल पहल से किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग और आवश्यक मानकों की जानकारी आसानी से उपलब्ध होने की उम्मीद है।

1,132 करोड़ रुपये तक पहुंचा कृषि निर्यात

प्रदेश में वर्तमान में लगभग 3,000 निर्यातक सक्रिय हैं, जो किसानों की उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश से कृषि एवं औद्यानिक उत्पादों का निर्यात 2016-17 में 727 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025-26 में 1,132 करोड़ रुपये हो गया है।

उत्तर प्रदेश की कृषि उपज अब अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जर्मनी और ब्रिटेन सहित 20 से अधिक देशों के बाजारों तक पहुंच रही है।

जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगा इंटीग्रेटेड टेस्टिंग ट्रीटमेंट पार्क

निर्यात को गति देने के लिए जेवर एयरपोर्ट के पास इंटीग्रेटेड टेस्टिंग ट्रीटमेंट पार्क विकसित करने की योजना है। इससे कृषि एवं औद्यानिक उत्पादों की आवश्यक जांच और उपचार संबंधी सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। एयर कार्गो के माध्यम से उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेजी से पहुंचाने में भी यह पार्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

किसानों के लिए भाव स्थिरता कोष

कृषि उत्पादों के बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव से किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये का भामाशाह भाव स्थिरता कोष स्थापित किया है। इसके अलावा किसानों को शीतगृह के किराये और बीज पर भी छूट उपलब्ध कराई जा रही है।

बैठक में कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय मानकों, पैकेजिंग, पेस्टिसाइड मैनेजमेंट, कोल्ड चेन और निर्यात प्रक्रिया से जुड़ी आवश्यकताओं पर विशेष चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी

कार्यशाला के दौरान एपीडा (APEDA), डेलॉयट, सीआईएसएच और सीआईपीएमए से जुड़े विशेषज्ञों ने औद्यानिक निर्यात की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर जानकारी दी। विशेषज्ञों ने किसानों और निर्यातकों को अच्छी कृषि पद्धतियों (GAP), अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और निर्यात के लिए आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं के बारे में भी विस्तार से बताया।

उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार का प्रयास है कि उत्तर प्रदेश के किसानों को केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रखते हुए उनकी उपज को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी पहचान दिलाई जाए।

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