भारत में शिक्षा की नई क्रांति: SED ने लॉन्च किया न्यूरोसाइंस-आधारित 'लर्निंग डायग्नोस्टिक्स' प्लेटफॉर्म
कैसे काम करता है यह प्लेटफॉर्म?
SED केवल यह नहीं मापता कि छात्र ने कितने अंक प्राप्त किए, बल्कि यह समझता है कि छात्र का मस्तिष्क जानकारी को कैसे प्रोसेस करता है।
-
ब्रेन-बेस्ड असेसमेंट: संज्ञानात्मक पैटर्न (Cognitive Patterns) को मैप कर यह प्लेटफॉर्म बताता है कि छात्र की ताकत क्या है और उसे कहाँ सुधार की जरूरत है।
-
व्यक्तिगत रोडमैप: यह शिक्षकों और अभिभावकों को शुरुआती स्तर पर ही 'लर्निंग गैप्स' (सीखने में कमी) को पहचानने और उन्हें दूर करने में मदद करता है।
-
360-डिग्री ट्रैकिंग: इसमें SAT और ACT आधारित फ्रेमवर्क और प्रोग्रेस ट्रैकिंग सिस्टम को एकीकृत किया गया है।
नेतृत्व के विचार
श्री श्रीनेश वी (संस्थापक, SED) पारंपरिक मूल्यांकन केवल परिणामों को मापते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि छात्र सीखता कैसे है। हमारा उद्देश्य स्कूलों और परिवारों को छात्रों के सीखने के पैटर्न को समझने में मदद करना है ताकि किसी भी छात्र को गलत न समझा जाए।”
ऐशली सांबालुक (सीईओ, SED): भारत में दुनिया की सबसे बड़ी छात्र आबादी है। यहाँ अधिकांश सिस्टम प्रदर्शन को मापते हैं, लेकिन SED इस सोच को बदलकर छात्रों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करेगा।”
प्रमुख साझेदारियां और समर्थन
इस लॉन्च के अवसर पर आयोजित 'लर्निंग इंटेलिजेंस समिट' में श्री चैतन्य एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस की निदेशक सुश्री सीमा बोप्पना और श्रीलंका के उप उच्चायुक्त डॉ. गणेशनाथन गीथिस्वरन ने इस पहल की सराहना की।
SED ने भारत में अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए कई रणनीतिक साझेदारियों की योजना बनाई है, जिनमें शामिल हैं
-
हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस (श्री सुरेश चंदर)
-
अमेरिकन एडुग्लोबल स्कूल (श्री पी. के. सांबल)
-
फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स, पंजाब (डॉ. जगजीत सिंह धूरी)
अमेरिका, वियतनाम और जॉर्जिया के बाद भारत अब SED के वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा बन गया है। यह कदम भारतीय छात्रों को अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी शैक्षणिक सहायता प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

