अगली पीढ़ी के लीडलेस पेसमेकर : असामान्य हृदय धड़कन के इलाज में नई क्रांति
Next generation leadless pacemakers: A new revolution in treating abnormal heart rhythms
Tue, 9 Sep 2025
लखनऊ डेस्क (प्रत्यूष पाण्डेय)।
आज के दौर में जहाँ हथेली के आकार की बैटरियां आधुनिक गैजेट्स को ऊर्जा देती हैं, वहीं चिकित्सा जगत में इससे भी छोटे उपकरण इंसान के दिल को धड़काने में मदद कर रहे हैं। यही है लीडलेस पेसमेकर – अगली पीढ़ी की वह तकनीक जो अतालता (Arrhythmia) यानी अनियमित धड़कन को नियंत्रित करने के लिए विकसित की गई है।
अतालता तब होती है जब हृदय बहुत तेज, बहुत धीमा या अनियमित रूप से धड़कता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकती है। इसका एक सामान्य प्रकार ब्रैडीकार्डिया है, जिसमें दिल इतनी धीमी गति से धड़कता है कि शरीर की ऑक्सीजन की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं।
विशेषज्ञों की राय
भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, हांगकांग, ताइवान और कोरिया में एबॉट के कार्डियक रिद्म मैनेजमेंट के महाप्रबंधक अजय सिंह चौहान बताते हैं –
“लीडलेस पेसमेकर को इस तरह विकसित किया गया है कि चिकित्सकों के लिए प्रत्यारोपण और हटाने की प्रक्रिया आसान हो जाए। मौजूदा तकनीकों की तुलना में इसमें बड़े सुधार हुए हैं और यह मरीजों के लिए जीवन बदलने वाला साबित होगा।”
अपोलो हॉस्पिटल, लखनऊ के सीनियर कंसलटेंट एवं इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अजय बहादुर का कहना है –
“हर साल हजारों मरीजों को पेसमेकर की जरूरत पड़ती है, लेकिन पारंपरिक पेसमेकर में सर्जरी, जटिलताएं और निशान जैसी समस्याएं आती हैं। लीडलेस पेसमेकर इस दिशा में बड़ा बदलाव हैं – ये न्यूनतम आक्रामक, बाहर से नज़र न आने वाले और कम जटिलताओं वाले उपकरण हैं।”
पारंपरिक बनाम लीडलेस पेसमेकर
पारंपरिक पेसमेकर: ये कॉलरबोन के पास त्वचा के नीचे लगाए जाते हैं और तारों (लीड्स) के जरिए हृदय से जुड़ते हैं। इनमें तार के खिसकने, टूटने या संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
लीडलेस पेसमेकर: ये तारों के बिना सीधे दिल में कैथेटर के जरिये लगाए जाते हैं। कैथेटर के दौरान पेसमेकर एक सुरक्षात्मक आवरण में रहता है, जिससे रक्त वाहिकाओं को नुकसान का खतरा कम हो जाता है।
नई पीढ़ी के पेसमेकर प्रत्यारोपण से पहले विद्युत मानचित्रण (Electrical Mapping) भी करते हैं, जिससे डॉक्टर को मरीज की हृदय संरचना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है और डिवाइस को सटीक स्थान पर लगाया जा सकता है।
लाभ
न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया
तेज़ रिकवरी और अस्पताल में कम समय
कोई दिखाई देने वाला निशान या उभार नहीं
संक्रमण और तार-संबंधी जटिलताओं की संभावना कम
मरीज अपनी दिनचर्या जल्दी शुरू कर सकते हैं
भारत में संभावनाएं
डॉ. बहादुर बताते हैं –
“यह तकनीक खासकर भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए उपयोगी है, जहाँ नियमित फॉलो-अप देखभाल सीमित होती है। लीडलेस पेसमेकर मरीजों को सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प देते हैं, जो हमारे बढ़ते स्वास्थ्य सेवा ढांचे से पूरी तरह मेल खाते हैं।”
