जल संरक्षण की दिशा में निरंकारी मिशन का सशक्त कदम: ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का चौथा चरण
Nirankari Mission takes a powerful step towards water conservation: Phase 4 of 'Project Amrit'
Wed, 18 Feb 2026
दिल्ली, 18 फरवरी 2026। जब सेवा साधना बन जाए और प्रकृति के प्रति संवेदना जीवन का मूल मंत्र हो, तब पावन संकल्प जन्म लेते हैं। मानव सेवा और लोक कल्याण की इसी दिव्य चेतना को साकार रूप देने हेतु संत निरंकारी मिशन द्वारा ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के अंतर्गत ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान के चौथे चरण का भव्य शुभारंभ रविवार, 22 फरवरी 2026, प्रातः 8 बजे से 11 बजे तक, परम श्रद्धेय सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन निर्देशानुसार समस्त भारत में एक साथ किया जा रहा है।
संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह विशाल जन-जागरण अभियान देशभर में 1500 से अधिक स्थानों पर एक साथ आयोजित होगा। इतने व्यापक स्तर पर आयोजन होने के कारण यह पहल ऐतिहासिक स्वरूप धारण करेगी और जल संरक्षण व स्वच्छता के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुँचाएगी।
इस अभियान का मूल उद्देश्य समाज को यह अनुभूति कराना है कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार और ईश्वर की अमूल्य देन है, जिसकी रक्षा करना प्रत्येक मानव का नैतिक कर्तव्य है। निरंकारी मिशन ने बाबा हरदेव सिंह जी की प्रेरणादायी शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए वर्ष 2023 में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का सूत्रपात किया था। यह पुनीत पहल जल संरक्षण को किसी एक दिवस या औपचारिक अभियान तक सीमित न रखकर उसे जीवनशैली, संस्कार और सेवा-भाव के रूप में अपनाने की प्रेरणा देती है, जिससे स्वच्छ जल के माध्यम से स्वच्छ मन और स्वच्छ समाज का निर्माण संभव हो सके।
नदियों, झीलों, तालाबों, कुओं एवं झरनों जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन हेतु समर्पित इस जनआंदोलन ने अपने पहले तीन चरणों में सेवा, समर्पण और सहभागिता की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है। इन्हीं उपलब्धियों से उत्साहित होकर चौथे चरण को और अधिक विस्तृत, संगठित और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है, ताकि समाज के हर वर्ग में प्रकृति के प्रति जागरूकता और सक्रिय सहभागिता की सुदृढ़ चेतना विकसित हो सके।
अभियान के दौरान भक्ति गीतों की मधुर प्रस्तुतियाँ, सामूहिक गान, जागरूकता संगोष्ठियाँ तथा सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जलजनित रोगों, स्वच्छता और जल संरक्षण के महत्व पर जनचेतना को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह पहल यह स्मरण कराती है कि जब मन निर्मल होता है, तभी प्रकृति स्वच्छ होती है, और जब सेवा में समर्पण जुड़ जाता है, तब समाज का नव-निर्माण संभव होता है।
परम श्रद्धेय सतगुरु माता जी का संदेश सदैव यही रहा है कि हम इस धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए पहले से अधिक सुंदर, स्वच्छ और संतुलित रूप में संजोकर रखें। ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान उसी पावन संकल्प का सजीव प्रतीक है, जो मानव को प्रकृति, समाज और आत्मा से जोड़ते हुए करुणा, संतुलन और सौहार्द से परिपूर्ण भविष्य की ओर मार्गदर्शन करता है।
