निर्वाण अस्पताल की ‘साइकॉन 2026’ कॉन्फ्रेंस में डिजिटल एडिक्शन, पेरेंटिंग और बदलती जीवनशैली पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

Experts shared their views on digital addiction, parenting, and changing lifestyles at Nirvana Hospital's 'PsyCon 2026' conference.
 
निर्वाण अस्पताल की ‘साइकॉन 2026’ कॉन्फ्रेंस में डिजिटल एडिक्शन, पेरेंटिंग और बदलती जीवनशैली पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
लखनऊ डेस्क (आर एल पाण्डेय)।
आज के तेज़ी से बदलते डिजिटल दौर में मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। यही संदेश PSYCON 2026 में दिया गया, जिसका आयोजन Nirvan Hospital द्वारा किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन में डिजिटल एडिक्शन, पेरेंटिंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी मानसिक चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि Brijesh Pathak ने कहा कि विकास और प्रगति की इस दौड़ में मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि लगभग 35 वर्ष पहले युवाओं में नशे की समस्या से निपटने के लिए ‘निर्वाण’ द्वारा शुरू की गई पहल को उन्होंने करीब से देखा है। आज के समय में बच्चों और युवाओं के लिए काउंसलिंग व्यवस्था और भी आवश्यक हो गई है, क्योंकि तेज़ रफ्तार जीवनशैली के साथ मानसिक दबाव भी तेजी से बढ़ रहा है।

सम्मेलन में एक उदाहरण साझा करते हुए बताया गया कि एक 18 वर्षीय युवक डिजिटल गेमिंग का इतना आदी हो गया कि उसने पहले University of Delhi की पढ़ाई छोड़ दी और बाद में कोटा में चल रहा कोर्स भी छोड़कर घर लौट आया। जांच करने पर पता चला कि वह प्रतिदिन 18 घंटे से अधिक समय गेम खेलने और देखने में बिताता था, जिससे उसकी पढ़ाई और जीवन दोनों प्रभावित हुए।

विशेषज्ञों ने कहा कि अक्सर माता-पिता बच्चों को व्यस्त रखने या खाना खिलाने के लिए मोबाइल फोन दे देते हैं, जो धीरे-धीरे बच्चों के लिए आदत और फिर लत बन जाता है। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को मोबाइल की बजाय रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें और डिजिटल हाइजीन पर भी ध्यान दें।

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इस अवसर पर Jai Shankar Mishra, निर्वाण अस्पताल के चेयरमैन डॉ. एच.के. अग्रवाल, मेडिकल डायरेक्टर डॉ. दीप्तांशु अग्रवाल, डायरेक्टर डॉ. प्रांजल अग्रवाल, विभागाध्यक्ष (क्लिनिकल साइकोलॉजी) एवं आयोजन की ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी आस्था शर्मा भी उपस्थित रहीं।

सम्मेलन में “डिजिटल एज में न्यूरोप्लास्टिसिटी”, “मनोवैज्ञानिक बीमारियों के इलाज में आरटीएमएस जैसी नई न्यूरोटेक्नोलॉजी की भूमिका”, “डिजिटल पेरेंटिंग की चुनौतियां”, “तकनीक के दौर में वैवाहिक रिश्तों पर प्रभाव” और “भावनाओं को संभालने की चुनौती” जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने सरल और रोचक ढंग से विचार साझा किए।

इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई विशेषज्ञों को सम्मानित भी किया गया। लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रो. (डॉ.) टी.बी. सिंह और प्रो. (डॉ.) कृष्ण दत्त को दिया गया। वहीं नशा मनोचिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रो. (डॉ.) पी.के. दलाल को सम्मानित किया गया।

इसके अलावा जनरल साइकियाट्री में डॉ. एच. नायडू, बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य में प्रो. (डॉ.) प्रभात सिथोले, मनो-यौन स्वास्थ्य में डॉ. आर.के. ठकराल, जेरियाट्रिक साइकियाट्री में प्रो. (डॉ.) एस.सी. तिवारी, साइकोथेरेपी एवं काउंसलिंग में डॉ. पल्लवी भटनागर, रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में प्रो. (डॉ.) ए.के. अग्रवाल, प्रोफेशनल प्रशिक्षण में प्रो. (डॉ.) अजय कोहली, कम्युनिटी एवं सोशल साइकियाट्री में डॉ. देवाशीष शुक्ला तथा पब्लिक मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में डॉ. पी.के. श्रीवास्तव को सम्मान प्रदान किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में तकनीक ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं मानसिक स्वास्थ्य के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। ऐसे में जागरूकता, संतुलित जीवनशैली और समय पर परामर्श के माध्यम से इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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