मध्यप्रदेश में नितिन नबीन का दौरा: मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल के लिए क्या संकेत?
पवन वर्मा — विनायक फीचर्स
मध्यप्रदेश भाजपा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाओं के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का 17 और 18 सितंबर का मध्यप्रदेश दौरा चर्चा में रहा। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह नबीन का मध्यप्रदेश का पहला दौरा था।
दौरे के दौरान इंदौर में स्वामित्व योजना से जुड़े कार्यक्रम और उज्जैन में भाजपा के सेवा संकल्प अभियान के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी रही। 18 सितंबर की सुबह उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ बाबा महाकाल की भस्म आरती में भी हिस्सा लिया।
ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि इस दौरे से मध्यप्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन—इन दोनों पक्षों के लिए क्या राजनीतिक संकेत सामने आए?
इंदौर में सरकार के कार्यक्रम के केंद्र में रहे मोहन यादव
नितिन नबीन ने अपने दौरे की शुरुआत इंदौर से की, जहां उन्होंने स्वामित्व योजना के तहत पंजीयन प्रक्रिया से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस योजना के माध्यम से लाभार्थियों को भूमि और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। रिपोर्टों के अनुसार कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोगों को दस्तावेज उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था।
यह कार्यक्रम राज्य सरकार की योजना से जुड़ा था, इसलिए इसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव की भूमिका स्वाभाविक रूप से प्रमुख रही। राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी ने सरकार की योजना को पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के कार्यक्रम से भी जोड़ा।
इस लिहाज से दौरे का इंदौर चरण मुख्यमंत्री के लिए सरकार की योजनाओं और प्रशासनिक कार्यक्रमों को राष्ट्रीय संगठन के सामने रखने का अवसर रहा।
उज्जैन में संगठन की भूमिका सामने आई
इंदौर के बाद नितिन नबीन उज्जैन पहुंचे। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह भाजपा के सेवा संकल्प अभियान से जुड़ा कार्यक्रम था, जिसे मध्यप्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जाना है।
उज्जैन में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल दोनों नितिन नबीन के साथ कार्यक्रमों में मौजूद रहे। शिप्रा तट पर दीप प्रज्ज्वलन और अन्य कार्यक्रमों में पार्टी संगठन की व्यापक भागीदारी रही।
इस हिस्से का महत्व इसलिए है क्योंकि महीने भर चलने वाले अभियान की सफलता बूथ और शक्ति केंद्र स्तर पर संगठन की सक्रियता से जुड़ी होगी। इस लिहाज से प्रदेश अध्यक्ष के सामने संगठनात्मक क्षमता को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी भी रहेगी।
महाकाल की भस्म आरती में हेमंत खंडेलवाल साथ रहे
18 सितंबर की सुबह नितिन नबीन ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे।
यह दौरे का अलग संदर्भ था। इंदौर में राष्ट्रीय अध्यक्ष सरकार से जुड़े कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ दिखाई दिए, जबकि उज्जैन के धार्मिक कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष उनके साथ रहे। इससे यह जरूर स्पष्ट होता है कि दौरे के अलग-अलग चरणों में सत्ता और संगठन, दोनों की भूमिकाओं को जगह मिली।
किसे मिला राजनीतिक लाभ?
नितिन नबीन के दौरे को केवल इस आधार पर किसी एक नेता के पक्ष में गया हुआ बताना जल्दबाजी होगी। इंदौर का स्वामित्व योजना कार्यक्रम सरकार और मुख्यमंत्री से जुड़ा था, जबकि उज्जैन में सेवा संकल्प अभियान और संगठनात्मक गतिविधियों ने प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका को सामने रखा।
यदि सरकार के नजरिये से देखा जाए तो मुख्यमंत्री मोहन यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राज्य सरकार की योजना के सार्वजनिक कार्यक्रम में अपनी भूमिका रखने का अवसर मिला। दूसरी ओर, संगठन के नजरिये से देखें तो हेमंत खंडेलवाल को राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ प्रदेशव्यापी अभियान और संगठनात्मक गतिविधियों में मौजूद रहने का अवसर मिला।
इसलिए तत्काल किसी एक नेता को स्पष्ट राजनीतिक बढ़त मिलने का निष्कर्ष निकालने के बजाय यह कहा जा सकता है कि दौरे ने दोनों नेताओं की अलग-अलग संस्थागत भूमिकाओं को सार्वजनिक रूप से सामने रखा।
आगे की परीक्षा सेवा संकल्प अभियान की
सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलना है। ऐसे में आने वाला एक महीना प्रदेश संगठन के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। बूथ स्तर तक कार्यक्रमों का संचालन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और लाभार्थियों तक पहुंच जैसे पहलुओं की जिम्मेदारी संगठन के सामने होगी।
यदि अभियान प्रभावी ढंग से संचालित होता है, तो उसका संगठनात्मक श्रेय प्रदेश नेतृत्व के कामकाज से भी जोड़ा जा सकता है। इसी तरह सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके परिणामों का आकलन मुख्यमंत्री के प्रशासनिक नेतृत्व के संदर्भ में किया जाएगा।
दौरे से सामने आया सत्ता-संगठन का साझा फ्रेम
नितिन नबीन के मध्यप्रदेश दौरे की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि उनके कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग संदर्भों में दिखाई दीं। उपलब्ध घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने सरकार और संगठन को अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ एक ही राजनीतिक ढांचे में प्रस्तुत किया।
अब इस दौरे की वास्तविक राजनीतिक अहमियत आने वाले दिनों में सरकार और संगठन के बीच समन्वय, सेवा संकल्प अभियान के क्रियान्वयन और प्रदेश भाजपा की गतिविधियों में दिखाई देगी। फिलहाल दौरे को किसी एक नेता के पक्ष में निर्णायक संकेत मानने के बजाय इसे सत्ता और संगठन दोनों की भूमिकाओं को साथ लेकर चलने वाले राष्ट्रीय नेतृत्व के कार्यक्रम के रूप में देखा जा सकता है।
(विनायक फीचर्स)
