स्कैम करने वालों की अब खैर नहीं! सिर्फ 10 MB में ट्रूकॉलर लाइट लॉन्च, पुराने एंड्रॉयड फोन पर भी मिलेगी स्पैम कॉल से सुरक्षा
फेस्टिव सीजन से पहले ट्रूकॉलर की नई पेशकश, 4GB तक RAM वाले फोन पर भी करेगा काम; कॉलर आईडी और स्पैम ब्लॉकिंग जैसे फीचर्स शामिल
लखनऊ। ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी कॉल्स से बचाव के लिए ट्रूकॉलर ने भारत में अपना नया ऐप ट्रूकॉलर लाइट (Truecaller Lite) लॉन्च किया है। करीब 10 MB आकार वाला यह ऐप खास तौर पर ऐसे एंड्रॉयड स्मार्टफोन के लिए तैयार किया गया है, जिनमें स्टोरेज और RAM सीमित होती है। कंपनी के मुताबिक, इस ऐप में कॉलर आईडी और स्पैम कॉल ब्लॉकिंग जैसी प्रमुख सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह 4GB तक RAM वाले स्मार्टफोन पर भी काम कर सकता है।
ट्रूकॉलर की यह पेशकश ऐसे समय में आई है, जब त्योहारों के दौरान ऑनलाइन खरीदारी, डिजिटल भुगतान और डिलीवरी सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ जाता है। इसी दौरान फर्जी डिलीवरी कॉल, आकर्षक ऑफर के नाम पर धोखाधड़ी और KYC अपडेट के बहाने ठगी करने वाले कॉल्स का जोखिम भी बना रहता है। कंपनी का कहना है कि ट्रूकॉलर लाइट को कम संसाधनों वाले फोन पर भी कॉल की पहचान और स्पैम से सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
कम स्टोरेज में भी मिलेगा कॉलर आईडी का लाभ
कई स्मार्टफोन यूजर्स को फोन में जगह की कमी और भारी ऐप्स के धीमे प्रदर्शन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। त्योहारों के दौरान फोटो, वीडियो और मैसेज बढ़ने से स्टोरेज की समस्या और गंभीर हो सकती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ट्रूकॉलर लाइट को छोटे आकार और कम मेमोरी खपत के साथ तैयार किया गया है।
कंपनी के अनुसार, यह मुख्य ट्रूकॉलर ऐप का केवल छोटा संस्करण नहीं, बल्कि कम मेमोरी और प्रोसेसिंग क्षमता वाले फोन के लिए तैयार किया गया अलग नेटिव एंड्रॉयड ऐप है। इसमें ट्रूकॉलर के डेटाबेस और कॉल डिटेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह ऐप उसके मुख्य ऐप की तरह ही स्पैम और फ्रॉड कॉल्स से सुरक्षा प्रदान करता है।
ट्रूकॉलर लाइट में मिलेंगी ये सुविधाएं
नए ऐप में रोजमर्रा के कॉलिंग अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई जरूरी फीचर्स दिए गए हैं।
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कॉलर आईडी: कॉल रिसीव करने से पहले कॉल करने वाले की पहचान जानने में मदद।
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स्पैम और फ्रॉड कॉल ब्लॉकिंग: ट्रूकॉलर की ग्लोबल कम्युनिटी से मिलने वाले संकेतों के आधार पर संदिग्ध कॉल्स की पहचान और उन्हें ब्लॉक करने की सुविधा।
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डायलर की सुविधा: कॉल हिस्ट्री, कॉन्टैक्ट्स और नंबर सर्च जैसे विकल्प एक ही जगह।
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आफ्टर-कॉल स्क्रीन: आने वाली और जाने वाली कॉल के बाद हालिया बातचीत से जुड़ी जानकारी देखने की सुविधा।
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कम स्टोरेज और मेमोरी की खपत: सीमित संसाधनों वाले स्मार्टफोन पर भी ऐप को सुचारु रूप से चलाने पर जोर।
ऐप का आकार छोटा रखने के लिए इसमें मैसेजिंग, वॉइसमेल, फैमिली प्रोटेक्शन और AI असिस्टेंट जैसे फीचर्स शामिल नहीं किए गए हैं।
सीईओ बोले—फोन की क्षमता सुरक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए
ट्रूकॉलर के सीईओ ऋषित झुनझुनवाला ने कहा कि स्कैम करने वाले यह देखकर कॉल नहीं करते कि किसी व्यक्ति के पास कौन-सा फोन है। इसलिए सुरक्षा भी फोन की क्षमता पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि कई यूजर्स पुराने या बेसिक एंड्रॉयड फोन पर बड़े ऐप्स इस्तेमाल करने में परेशानी महसूस करते हैं। भारत में भी लोगों ने ट्रूकॉलर को इस्तेमाल करने की इच्छा जताई थी, लेकिन स्टोरेज की कमी या ऐप के सुचारु रूप से न चलने जैसी समस्याएं सामने आती थीं। उनके मुताबिक, ट्रूकॉलर लाइट ऐसे यूजर्स को कम जगह लेने वाले और तेज ऐप के जरिए स्पैम तथा फ्रॉड कॉल्स से सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाया गया है।
2025 में 68 अरब से ज्यादा स्पैम और फ्रॉड कॉल्स की पहचान का दावा
कंपनी के अनुसार, ट्रूकॉलर की तकनीक ने वर्ष 2025 में 68 अरब से अधिक स्पैम और फ्रॉड कॉल्स की पहचान की थी। ट्रूकॉलर लाइट में भी इसी कॉल डिटेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, किसी भी कॉलर आईडी या स्पैम ब्लॉकिंग ऐप से हर धोखाधड़ी वाली कॉल की पहचान होने की गारंटी नहीं मानी जानी चाहिए। यूजर्स को अनजान कॉल पर OTP, बैंकिंग पासवर्ड या संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।
गूगल प्ले स्टोर से मुफ्त डाउनलोड
ट्रूकॉलर लाइट भारत में गूगल प्ले स्टोर पर मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। यह केवल एंड्रॉयड स्मार्टफोन के लिए पेश किया गया है और 4GB तक RAM वाले डिवाइस पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के मुताबिक, ऐप को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा रहा है, इसलिए सभी उपयुक्त डिवाइस पर इसकी उपलब्धता में कुछ समय लग सकता है।
