ओडीओपी बना आत्मनिर्भरता का मॉडल, दीपावली पर यूपी के स्थानीय कारोबार को मिल रही मजबूती
75 जिलों के पारंपरिक उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान, स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए बढ़े बाजार के अवसर
धनतेरस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की अपील, उपहार में ओडीओपी उत्पादों को दें प्राथमिकता
लखनऊ, 6 नवंबर 2026। उत्तर प्रदेश में स्थानीय उद्योगों, पारंपरिक हस्तशिल्प और छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना अब प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ने का एक प्रमुख माध्यम बन रही है। दीपावली के अवसर पर स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग से कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए नया बाजार मिल रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2018 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को पहचान दिलाने के साथ उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है। मिट्टी के दीये, टेराकोटा कलाकृतियां, हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र और सजावटी सामान की खरीदारी से स्थानीय कारोबार को प्रोत्साहन मिल रहा है।
75 जिलों के पारंपरिक हुनर को मिली नई पहचान
ओडीओपी योजना के तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के विशिष्ट उत्पादों को चिह्नित कर उनके संरक्षण, संवर्धन और विपणन की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से वाराणसी की बनारसी साड़ी, लखनऊ की चिकनकारी, कन्नौज का इत्र, मुरादाबाद के पीतल उत्पाद, भदोही की कालीन, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी और गोरखपुर की टेराकोटा कला को व्यापक पहचान मिली है।
योजना के तहत कारीगरों और उद्यमियों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, तकनीकी उन्नयन, आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिल रही है।
दीपावली पर स्थानीय कारीगरों को मिला बाजार
दीपावली के अवसर पर लखनऊ में आयोजित माटी कला महोत्सव स्थानीय कारीगरों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया है। डालीबाग स्थित खादी भवन परिसर में आयोजित महोत्सव में 40 से अधिक स्टॉल लगाए गए। यहां मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं और विभिन्न प्रकार के सजावटी उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र बने।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कारीगरों और उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और उनकी बिक्री का अवसर मिला। इससे उन्हें सीधे ग्राहकों तक पहुंचने और अपने कारोबार का विस्तार करने में सहायता मिली।
इसी तरह यूपीआईटीएस-2025 में ओडीओपी के 466 स्टॉल के माध्यम से 20.77 करोड़ रुपये के बिजनेस लीड और डील प्राप्त हुईं। सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भी इन उत्पादों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय कारोबारियों को नए ग्राहक और बाजार मिल रहे हैं।
ओडीओपी से 3.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर
ओडीओपी योजना का प्रभाव स्थानीय कारोबार के साथ रोजगार सृजन पर भी दिखाई दे रहा है। ओडीओपी मार्जिन मनी योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2018-19 से अब तक 21 हजार से अधिक लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई है। इस दौरान 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक की मार्जिन मनी जारी होने और 3.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की जानकारी दी गई है।
इसके साथ ही प्रदेश के निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात वर्ष 2017-18 में 88 हजार करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कर रहे स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार 'वोकल फॉर लोकल' के माध्यम से स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी दौरों और विदेशी प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश के ओडीओपी उत्पादों को उपहार के रूप में भेंट करते रहे हैं।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धनतेरस और धन्वंतरि जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों से अपील की कि वे दीपावली पर उपहार देने के लिए ओडीओपी उत्पादों को प्राथमिकता दें और स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदकर 'लोकल वाली दिवाली' मनाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओपी उत्पादों की एक खरीदारी किसी हुनरमंद परिवार के आंगन में स्वावलंबन और सम्मान का दीप जला सकती है। ओडीओपी योजना के माध्यम से प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को नई पहचान देने, कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। दीपावली जैसे त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों की खरीदारी इस पहल को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
