चार दिवसीय बांसुरी वादन कार्यशाला के तीसरे दिन सुरों की धुनों में झूम उठा बलरामपुर

स्पिक मैके द्वारा आयोजित संगीत समारोह में बांसुरी की मधुर तानें बनी आकर्षण का केंद्र
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शारदा पब्लिक स्कूल में पंडित चेतन जोशी की बांसुरी वादन से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
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राग बसंत मुखारी की प्रस्तुति के साथ बांसुरी उत्सव का तीसरा दिन बना यादगार
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सांस्कृतिक समागम में बांसुरी–तबला की जुगलबंदी ने बांधा समां
 
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साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था स्पिक मैके, संस्कृति मंत्रालय उत्तर प्रदेश तथा भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में बलरामपुर व गोण्डा जिलों में आयोजित चार दिवसीय बांसुरी वादन कार्यशाला के तीसरे दिन शुक्रवार को संगीत की सुरीली धुनों ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया। बांसुरी से निकलती मधुर लयों पर श्रोता झूमने को मजबूर हो उठे।

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14 नवंबर को बलरामपुर स्थित शारदा पब्लिक स्कूल में तीसरे दिन के प्रथम सत्र का शुभारंभ मुख्य कलाकार संगीत नाटक अकादमी अवार्डी पंडित चेतन जोशी, तबला संगतकार डॉ. निशांत कुमार सिंह, संयुक्त सचिव शिवम चौहान, विद्यालय प्रबंधक पराग बोस तथा प्रधानाचार्य सुदीपा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

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कार्यक्रम की शुरुआत पंडित चेतन जोशी द्वारा प्रस्तुत राग बसंत मुखारी से हुई, जिसमें अलाप, झाला और तानों की मनोहारी प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने भक्ति रस से ओत-प्रोत धुन "मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे" प्रस्तुत की, जिसकी सुरीली बांसुरी ने सभागार में आध्यात्मिक माहौल बना दिया।
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दूसरा सत्र तुलसीपुर के एम कॉन्वेंट स्कूल, गुलहरियाघाट कैलाशगढ़ में आयोजित हुआ, जहां प्रबंधक सुरेश मौर्य और प्रधानाचार्य नीलम ने कलाकारों का स्वागत किया। इस चरण की संगीत यात्रा राग शुद्ध सारंग से प्रारंभ हुई। पंडित चेतन जोशी और डॉ. निशांत की बांसुरी-तबला जुगलबंदी ने उपस्थित बच्चों और शिक्षकों को संगीत के अद्वितीय आनंद से भर दिया।
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कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे तथा शास्त्रीय संगीत की इस अद्भुत प्रस्तुति का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।

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