वनतारा का एक साल: उपचार, पुनर्वास और वन्यजीव संरक्षण में गढ़ी नई मिसाल

उद्योगपति अनंत अंबानी की परिकल्पना से शुरू हुई इस पहल ने पहले ही वर्ष में हजारों वन्यजीवों को नया जीवन देने का प्रयास किया है। शेर, चीते, सरीसृप, प्राइमेट्स, पक्षियों और अन्य स्तनधारियों सहित विभिन्न प्रजातियों के जानवरों का उपचार किया गया, जिनमें से कई स्वस्थ होने के बाद अपने प्राकृतिक आवासों में लौटाए गए। संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए वनतारा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली और ‘ग्लोबल ह्यूमेन अवॉर्ड’ सहित कई सम्मानों से नवाजा गया। संस्था को EARAZA और SEAZA की सदस्यता, ग्लोबल ह्यूमेन कंज़र्वेशन सर्टिफिकेशन तथा ‘प्राणी मित्र अवॉर्ड 2025’ भी प्राप्त हुआ है।
हाथियों और अन्य वन्यजीवों के लिए समर्पित देखभाल
वनतारा ने विशेष रूप से उन जानवरों की देखभाल पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें शोषण या कठिन परिस्थितियों से मुक्त कराया गया था। लकड़ी ढुलाई, सर्कस और सवारी गतिविधियों से बचाए गए 250 से अधिक हाथियों को यहां दीर्घकालिक चिकित्सा और पुनर्वास सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही हजारों मगरमच्छों और अन्य वन्यजीवों के लिए वैज्ञानिक निगरानी और पोषण-आधारित देखभाल की समग्र व्यवस्था विकसित की गई है।
अत्याधुनिक पोषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र
संस्था प्रतिदिन 1,56,000 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला पोषण ऑटोमेटेड सिस्टम के माध्यम से तैयार करती है, जिसे 50 तापमान-नियंत्रित वाहनों से वितरित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन 200 प्रशिक्षित पेशेवर करते हैं, जिससे चारा उगाने वाले 1,000 से अधिक किसानों को भी समर्थन मिलता है।24x7 सक्रिय 200 सदस्यों की रेस्क्यू टीम ने 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय बचाव अभियानों और 15 वाइल्डलाइफ रैपिड रिस्पॉन्स ऑपरेशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राष्ट्रीय रेफरल सेंटर के रूप में पहचान
वनतारा को पश्चिम भारत के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव रेफरल सेंटर के रूप में नामित किया गया है। यहां स्थापित केंद्रीय प्रयोगशाला और 11 सैटेलाइट लैब प्रतिदिन हजारों डायग्नोस्टिक नमूनों की जांच करने में सक्षम हैं। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, बायो-बैंकिंग और नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से वन्यजीव स्वास्थ्य को ‘वन हेल्थ’ ढांचे से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पुनर्वास और सामुदायिक सहभागिता
बीते वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों में गुजरात वन विभाग के सहयोग से बरडा वन्यजीव अभयारण्य में 53 चीतल हिरणों की पुनर्वापसी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्नेक-नेक्ड कछुओं की रीवाइल्डिंग पहल शामिल रही। संस्था ने संरक्षण चिकित्सा में सैकड़ों पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया, 50 से अधिक ज्ञान-साझा कार्यक्रम आयोजित किए और बच्चों व युवाओं को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने के लिए विशेष आउटरीच अभियान चलाए।
आपदा में भी सक्रिय भूमिका
पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान वनतारा ने राहत कार्यों में भाग लेते हुए प्रभावित समुदायों और वन्यजीवों की सहायता की। इससे यह संदेश सुदृढ़ हुआ कि पर्यावरणीय संतुलन और मानव कल्याण परस्पर गहराई से जुड़े हैं।

एक वर्ष के भीतर वनतारा रेस्क्यू, रिसर्च, रीवाइल्डिंग और सामुदायिक सहभागिता को जोड़ने वाले एकीकृत संरक्षण इकोसिस्टम के रूप में स्थापित हुआ है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों को दूसरा जीवन देना और प्रकृति के साथ संतुलित भविष्य की दिशा में ठोस योगदान करना है।





