लखनऊ विश्वविद्यालय में प्राकृतिक हर्बल गुलाल उत्पादन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

सांझी रेखा स्वयं सहायता समूह व लखनऊ विश्वविद्यालय का संयुक्त प्रयास
 
सांझी रेखा स्वयं सहायता समूह व लखनऊ विश्वविद्यालय का संयुक्त प्रयास
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के वन्य जीव शिक्षण संस्थान तथा सांझी रेखा स्वयं सहायता समूह के सहयोग से प्राकृतिक हर्बल गुलाल उत्पादन पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कुल 35 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित ईआईएसीपी पीसी-आरपी इकाई द्वारा किया गया, जो पर्यावरण के अनुकूल और प्राकृतिक होली रंगों की तैयारी पर केंद्रित था। इस पहल का उद्देश्य पुष्प अपशिष्ट और जैविक सब्जियों का उपयोग कर सुरक्षित एवं स्वास्थ्यवर्धक हर्बल गुलाल तैयार करना था, ताकि कृत्रिम रासायनिक रंगों का बेहतर विकल्प उपलब्ध कराया जा सके।

लखनऊ विश्वविद्यालय में प्राकृतिक हर्बल गुलाल उत्पादन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

कार्यशाला में सांझी रेखा स्वयं सहायता समूह की प्रमुख बंदना सिंह मुख्य प्रशिक्षक रहीं। वहीं, 20 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ सुनीता सिंह ने मंदिरों में चढ़ाए गए पुष्प अपशिष्ट को हर्बल गुलाल में परिवर्तित करने की प्रक्रिया साझा की। उल्लेखनीय है कि यह स्वयं सहायता समूह वर्तमान में लखनऊ के तीन गांवों में 90 से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रहा है।

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इस अवसर पर वन्य जीव विभाग की प्रमुख अमिता कनौजिया ने बताया कि यह पहल मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों को पुनर्चक्रित कर बाजार में बिकने योग्य उत्पादों में परिवर्तित करती है, जिससे जल निकायों को प्रदूषण से बचाया जा सकता है। साथ ही यह महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती प्रदान करती है।

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कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को उत्पादन प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें वनस्पति कच्चे माल को उच्च गुणवत्ता वाले हर्बल गुलाल में व्यवस्थित रूप से परिवर्तित करने की विधि समझाई गई। कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण और स्वरोजगार के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल प्रस्तुत की।

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