I Love मोहम्मद" पोस्टर विवाद: क्या धार्मिक अभिव्यक्ति पर सवाल उठ रहे हैं? ओवैसी का तीखा हमला और सियासी बयानबाजी
आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे विवाद की जो पूरे देश को हिला रहा है। उत्तर प्रदेश के बरेली में 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर लगाने को लेकर जो बवाल मचा, वो अब सियासत की आग में बदल गया है। AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा सरकार पर ऐसा तीखा हमला बोला है कि सुनकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा – 'इस देश में आई लव मोदी तो कह सकते हैं, लेकिन आई लव मोहम्मद नहीं!' क्या है ये पूरा मामला? क्यों भड़के ओवैसी? और क्या ये मुसलमानों के अधिकारों पर सीधा सवाल है?
सबसे पहले आइए समझते हैं कि ये विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ। उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में कुछ मुस्लिम युवकों ने पैगंबर मोहम्मद साहब के सम्मान में 'आई लव मोहम्मद' लिखे पोस्टर लगाए। ये पोस्टर एक तरह से उनके प्रेम और सम्मान का इजहार था। लेकिन जैसे ही ये सोशल मीडिया पर वायरल हुए, हंगामा मच गया। कुछ लोगों ने इसे 'एंटी-नेशनल' करार दे दिया। बरेली में तनाव इतना बढ़ गया कि भारी पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी, इंटरनेट बंद कर दिया गया, और जुमे की नमाज के दौरान सख्ती बरती गई। वीडियोज वायरल हो गए जहां पुलिस लाठीचार्ज करती नजर आ रही है, और कुछ दुकानदारों पर फूल बरसाते हुए विरोध जताते दिखे। लेकिन सवाल ये है – क्या 'आई लव मोहम्मद' कहना कोई अपराध है? ओवैसी ने यही सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई 'आई लव मोदी' कहे तो मीडिया खुश हो जाता है, लेकिन 'आई लव मोहम्मद' पर तो जैसे देश का दुश्मन बन जाता है। ये विवाद सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं है। इससे पहले संभल में मस्जिद विवाद को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है, जहां मस्जिदें छीनी जा रही हैं। असम में 3000 मुसलमानों को बेघर कर दिया गया, दावा किया गया कि वो सरकारी जमीन पर बसे थे। ओवैसी ने पूछा – आप इस देश को कहां ले जा रहे हैं? ये सब मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों पर हमला है।
अब आइए सुनते हैं ओवैसी साहब के शब्दों में। हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा – 'संभल मस्जिद को लेकर मुकदमा चल रहा है। हमारी मस्जिदें छीनी जा रही हैं। इस देश में कोई 'आई लव मोदी' तो कह सकता है, लेकिन 'आई लव मोहम्मद' नहीं। अगर कोई 'आई लव मोदी' कहता है, तो मीडिया भी खुश हो जाता है। अगर कोई 'आई लव मोहम्मद' कहता है, तो उस पर आपत्ति होती है।' ओवैसी ने आगे कहा कि अगर मैं मुसलमान हूं, तो मुहम्मद की वजह से हूं। देश की आजादी में हिस्सा लेने वाले 17 करोड़ भारतीयों के लिए इससे बढ़कर कुछ नहीं। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि हमें धैर्य रखना चाहिए, कानून के दायरे में रहना चाहिए, लेकिन अपने हक के लिए लड़ना भी जरूरी है। बरेली हिंसा पर ओवैसी ने साफ कहा – हम हिंसा की निंदा करते हैं। लेकिन पुलिस केवल सत्ता में बैठे लोगों के प्रति जवाबदेह है, किसी और के प्रति नहीं। उन्होंने वक्फ कानून पर भी निशाना साधा, कहा कि ये मुस्लिम समुदाय को कमजोर करने की साजिश है। ओवैसी ने मुसलमानों से कहा – पांच वक्त की नमाज पढ़ो, रोजा रखो, औरतों पर हाथ मत उठाओ। ये ही असली मोहब्बत है पैगंबर साहब से। और हां, उन्होंने भाजपा पर तंज कसा – अगर 'हैप्पी बर्थडे मोदी' कहना ठीक है, तो 'आई लव मोहम्मद' में एंटी-नेशनल क्या है? BJP के लिए तो 'मुगले आजम' का गाना प्ले करना पड़ेगा! ये सुनकर सभा में ठहाके गूंज उठे। ओवैसी का ये अंदाज हमेशा की तरह तीखा और सटीक था।"
ये पहली बार नहीं है जब ओवैसी ने ऐसे मुद्दों पर आवाज उठाई है। याद कीजिए वक्फ बिल विवाद, जब उन्होंने कहा था कि मोदी जी बैसाखियों पर टिके हैं – नीतीश, चंद्रबाबू, चिराग और जयंत का सहारा। उन्होंने कहा था कि ये बिल मुस्लिम वक्फ बोर्ड को बर्बाद कर देगा। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने ओवैसी पर पलटवार किया, कहा कि वो मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं। लेकिन ओवैसी ने साफ कहा – हम झूठ नहीं बोलते, हकीकत बताते हैं। अब सवाल ये है कि ये विवाद क्यों बार-बार उठता है? एक तरफ मुसलमानों का धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार संविधान में गारंटीड है, लेकिन दूसरी तरफ सियासत इसे वोट बैंक में बदल देती है। बरेली में जो हुआ, वो सिर्फ पोस्टर का मुद्दा नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों की भावनाओं का सवाल है। ओवैसी ने सही कहा – एक मुसलमान का ईमान तब तक पूरा नहीं होता जब तक वो पैगंबर मोहम्मद से दुनिया की हर चीज से ज्यादा मोहब्बत न करे। एनालिसिस करें तो ये दिखाता है कि देश में religious tolerance पर सवाल उठ रहे हैं। असम, संभल, बरेली – हर जगह मुसलमानों को टारगेट क्यों? ओवैसी ने पहलगाम हमले का भी जिक्र किया, कहा कि पाकिस्तान को जवाब देने का मौका था, लेकिन ऑपरेशन रोक दिए गए। ये सब मिलकर एक बड़ा पिक्चर बनाते हैं – जहां एक तरफ राष्ट्रवाद की बात, दूसरी तरफ अल्पसंख्यकों का दमन। और भाजपा का रिएक्शन? वो कहते हैं कि ये एंटी-नेशनल है। लेकिन ओवैसी का काउंटर – अगर 'आई लव मोदी' नेशनल है, तो 'आई लव मोहम्मद' क्यों नहीं? ये डबल स्टैंडर्ड नहीं तो क्या है?
अब बात करते हैं इसके ब्रॉडर इम्पैक्ट की। बिहार चुनाव आने वाले हैं, और ओवैसी ने सीमांचल में अकेले लड़ने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा – अभी खेल बाकी है। मोहब्बत सियासत में एकतरफा नहीं चलती। BJP, JD(U), कांग्रेस – सबको चेतावनी दी कि जनता जवाब देगी। मुस्लिम समुदाय के लिए ये मुद्दा बहुत बड़ा है। ओवैसी ने अपील की – हमें कानूनी लड़ाई लड़नी है, हिंसा नहीं। लेकिन सरकार को भी सोचना चाहिए – क्या ये देश सबके लिए बराबर है? अगर 'आई लव' कहना अपराध बन जाए, तो लोकतंत्र कहां बचेगा? मेरा ओपिनियन? ओवैसी ने जो कहा, वो सच्चाई का आईना है। हमें धार्मिक सद्भाव बनाए रखना चाहिए। नफरत फैलाने वाले जो भी हों, उनका विरोध करें। लेकिन याद रखें, संविधान सबको बराबर का हक देता है।
ये था 'आई लव मोहम्मद' विवाद पर ओवैसी का गुस्सा। आपका क्या ख्याल है ? कमेंट्स में बताएं – क्या ओवैसी सही हैं ? या ये ओवररिएक्शन है.
