राष्ट्रीय पुस्तक मेले में पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु ने डॉ. रश्मि श्रीवास्तव की आठ पुस्तकों का किया विमोचन
लखनऊ, 3 अक्टूबर 2026। 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में शनिवार को साहित्य और शिक्षा जगत से जुड़े पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन किया गया। इस वर्ष का राष्ट्रीय पुस्तक मेला ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष की थीम को समर्पित है। समारोह में महिला विद्यालय डिग्री कॉलेज, लखनऊ के बी.एड. विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि श्रीवास्तव द्वारा रचित एवं संपादित आठ पुस्तकों का लोकार्पण मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु और कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र विक्रम सहित मंचासीन अतिथियों ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया। समारोह में साहित्य, शिक्षा, बाल साहित्य, पर्यावरण, भारतीय ज्ञान परंपरा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े शिक्षाविद, साहित्यकार, विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद रहे।
आठ पुस्तकों का हुआ विमोचन
समारोह में विमोचित पुस्तकों में ‘नैतिक शिक्षा बालगीत’, ‘अम्मा की लोरी’, ‘पर्यावरण शिक्षा बालगीत’, ‘पोस्ट बॉक्स’, ‘नीम के पेड़’, ‘भारतीय ज्ञान परंपरा के शैक्षिक निहितार्थ’, ‘शिक्षा के दार्शनिक तथा समाजशास्त्रीय आधार’ तथा ‘भारतीय सामाजिक संदर्भ तथा शिक्षा’ शामिल हैं।
पुस्तकों की विषयवस्तु के बारे में डॉ. रश्मि श्रीवास्तव ने बताया कि इनके माध्यम से बच्चों में नैतिक एवं पर्यावरणीय चेतना विकसित करने के साथ भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और शिक्षा के सामाजिक एवं दार्शनिक पक्षों को सरल एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने अपनी लेखन यात्रा और पुस्तकों की रचना के पीछे की प्रेरणा के बारे में भी जानकारी साझा की।
चित्रांकन और कवर डिजाइन पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में श्री अमृतांश श्रीवास्तव ने पुस्तकों के चित्रांकन और कवर डिजाइन की संकल्पना एवं रचनात्मक प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पुस्तक की विषयवस्तु के अनुरूप तैयार किए गए चित्र और आवरण पाठकों को सामग्री से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बाद पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु, प्रो. सुरेंद्र विक्रम और अन्य मंचासीन विशिष्ट अतिथियों ने सभी आठ पुस्तकों का औपचारिक विमोचन किया।
साहित्य और पुस्तक संस्कृति के महत्व पर वक्ताओं ने रखे विचार
समारोह में श्रीमती अलका प्रमोद ने साहित्य, पुस्तक संस्कृति और रचनात्मक लेखन से जुड़े अपने विचार साझा किए। मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु ने साहित्यिक सृजन, रचनात्मकता और पुस्तक संस्कृति के महत्व पर चर्चा करते हुए डॉ. रश्मि श्रीवास्तव को आठ पुस्तकों के विमोचन पर शुभकामनाएं दीं।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. सुरेंद्र विक्रम ने साहित्य और सृजन की सामाजिक भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने पुस्तकों को ज्ञान, संवेदना और विचारों के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। कार्यक्रम के दौरान मूल्यपरक शिक्षा, बाल साहित्य, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा शिक्षा के दार्शनिक एवं समाजशास्त्रीय पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों को भेंट की गईं पुस्तकें
डॉ. रश्मि श्रीवास्तव ने विभिन्न शिक्षण संस्थानों के पुस्तकालयों के लिए अपनी पुस्तकों की प्रतियां भेंट कीं। लखनऊ विश्वविद्यालय, महर्षि विश्वविद्यालय, चरक महाविद्यालय और गौतम बुद्ध महाविद्यालय के पुस्तकालयों के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के साथ पठन-पाठन एवं साहित्य के प्रति रुचि को बढ़ावा देना रहा।
विद्यार्थियों से पुस्तक पढ़ने का आह्वान
कार्यक्रम में श्री अवधेश कुमार श्रीवास्तव, लेखाधिकारी, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन, लखनऊ ने विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सूचना के कई माध्यम उपलब्ध होने के बावजूद पुस्तक अध्ययन का अपना महत्व है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अध्ययन, ज्ञानार्जन और रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि विद्यार्थी विकसित भारत 2047 की मजबूत नींव हैं। इस अवसर पर श्रीमती मुग्धा श्रीवास्तव ने भी अतिथियों का स्वागत किया।
विद्यार्थियों ने अतिथियों से किया संवाद
समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने मंचासीन लेखकों और अतिथियों से संवाद किया। उन्होंने पुस्तकों की विषयवस्तु, लेखन प्रक्रिया, साहित्यिक विषयों और अध्ययन से जुड़े सवाल पूछे। अतिथियों और लेखकों ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्हें नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने और साहित्य से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।कार्यक्रम का संचालन श्री अभिनव श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को क्रमबद्ध तरीके से संचालित किया।
अंत में डॉ. सपन अस्थाना, कार्यक्रम अधिकारी, राष्ट्रीय सेवा योजना, महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु, अध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र विक्रम, विशिष्ट अतिथियों, लेखिका डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, श्री अमृतांश श्रीवास्तव और सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।इस अवसर पर डॉ. अनुराधा तिवारी, प्राचार्या, चरक डिग्री कॉलेज, श्री विनय श्रीवास्तव, डॉ. मृदुला सिंह सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं डिग्री कॉलेजों के शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे।
