पाकिस्तान की सियासत में भूचाल: क्या टूट रही है आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की जोड़ी?
आज हम बात करने जा रहे हैं पाकिस्तान की सियासत में मची उस उथल-पुथल की, जो पूरी दुनिया की नजरों में है। जिस आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ के दम पर पाकिस्तान भारत के खिलाफ उछल रहा था, अब उनकी कुर्सी खतरे में है। आखिर क्या हो रहा है पाकिस्तान में? क्या आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की जोड़ी टूटने वाली है? और सबसे बड़ा सवाल - अब इन दोनों को कौन बचाएगा? चलिए, इस सियासी ड्रामे की पूरी कहानी को डिटेल में समझते हैं।
पाकिस्तान की राजनीति हमेशा से एक रोलर कोस्टर रही है। लेकिन 2025 में जो कुछ हो रहा है, वो पहले से कहीं ज्यादा ड्रामेटिक है। हाल के महीनों में पाकिस्तान की सियासत में एक के बाद एक ऐसे धमाके हो रहे हैं, जो शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की सत्ता को हिला रहे हैं। पाकिस्तान की जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इमरान खान को जेल में डालकर आसिम मुनीर ने सत्ता को तो अपने कंट्रोल में ले लिया था, लेकिन हालात अब उनके पक्ष में नहीं दिख रहे। शहबाज शरीफ को पीएम बनाकर सेना ने सोचा था कि वो उनके इशारों पर नाचेंगे, लेकिन शहबाज की नाकामी और जनता का गुस्सा अब दोनों के लिए मुसीबत बन रहा है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में कबूल किया कि देश में लोकतंत्र नहीं, बल्कि एक हाइब्रिड मॉडल चल रहा है, जहां असली ताकत सेना के पास है। ये बयान अपने आप में बहुत बड़ा है, क्योंकि ये साफ करता है कि शहबाज शरीफ सिर्फ एक कठपुतली हैं, और असली सत्ता आसिम मुनीर के हाथों में है। लेकिन अब सवाल ये है - क्या ये हाइब्रिड मॉडल अब ढहने की कगार पर है?
पाकिस्तान की सेना ने हमेशा देश की सियासत में दखल दिया है, और आसिम मुनीर इस परंपरा को और ऊंचाई पर ले गए। मई 2025 में शहबाज शरीफ की कैबिनेट ने आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का पद दिया। ये वो रैंक है, जो पाकिस्तान में सिर्फ एक बार पहले देखा गया था - 1959 में जनरल अयूब खान ने खुद को ये पद दिया था। लेकिन इस बार ये प्रमोशन कई सवाल उठा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। भारतीय सेना ने न सिर्फ आतंकी कैंप्स, बल्कि पाकिस्तानी सेना के कई रणनीतिक ठिकानों को भी नेस्तनाबूद किया। इसके बावजूद, शहबाज सरकार ने दावा किया कि ये उनकी जीत थी और आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल बनाकर इस झूठे प्रचार को और हवा दी। लेकिन सच ये है कि जनता अब इस प्रोपेगेंडा को समझ रही है।
पाकिस्तानी पत्रकार वकार मलिक जैसे कई लोग खुलकर कह रहे हैं कि आसिम मुनीर का ये फील्ड मार्शल बनना सिर्फ एक दिखावा है। जनता में गुस्सा है कि मुनीर ने न तो भारत के हमलों को रोका और न ही देश की अर्थव्यवस्था को संभाला। फिर ये प्रमोशन क्यों? क्या ये शहबाज शरीफ का सेना को खुश करने का तरीका है, या फिर आसिम मुनीर की सत्ता को और मजबूत करने की साजिश?
शहबाज शरीफ की सरकार पहले ही आर्थिक संकट और जनता के गुस्से से जूझ रही थी। IMF, UAE और सऊदी अरब से कर्ज लेकर वो किसी तरह अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर और भारत के साथ बढ़ते तनाव ने सब कुछ बिगाड़ दिया। सिंध, कराची और लाहौर जैसे इलाकों में सायरन सिस्टम, बंकर निर्माण और रेड अलर्ट ने जनता में डर पैदा कर दिया है। लोग सड़कों पर उतर रहे हैं, और इमरान खान की पार्टी PTI के समर्थकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इमरान की बहन अलीमा खान ने तो आसिम मुनीर को "पाकिस्तान का बादशाह" तक कह डाला।
शहबाज और आसिम मुनीर ने इमरान खान से मदद मांगने की कोशिश भी की, ताकि जनता का गुस्सा शांत हो। लेकिन क्या ये कोशिश कामयाब होगी? X पर कई पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शहबाज और मुनीर में से कोई एक जल्द ही सत्ता से बाहर हो सकता है। कुछ लोग तो ये भी कह रहे हैं कि आसिम मुनीर तख्तापलट की तैयारी में हैं, और शहबाज को जेल भेज सकते हैं।
मई 2025 में शहबाज शरीफ के साथ तुर्की और ईरान के दौरे पर मुनीर की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि वो सिर्फ आर्मी चीफ नहीं, बल्कि विदेश नीति में भी दखल दे रहे हैं। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन से उनकी सीधी मुलाकात और शहबाज के सामने उनकी तारीफों के पुल बांधना, ये सब दिखाता है कि मुनीर अब खुलकर सत्ता की कमान अपने हाथ में लेना चाहते हैं।
कई जानकारों का मानना है कि मुनीर अमेरिका का समर्थन हासिल कर चुके हैं। अगर ऐसा है, तो क्या वो राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को हटाकर खुद सत्ता की बागडोर संभाल लेंगे? या फिर शहबाज शरीफ को भी रास्ते से हटाएंगे?
पाकिस्तान इस वक्त एक बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। अर्थव्यवस्था पहले ही चरमरा रही है, और भारत के साथ तनाव ने हालात को और बिगाड़ दिया है। जनता का गुस्सा, सेना का दबदबा और शहबाज शरीफ की नाकामी - ये सब मिलकर एक विस्फोटक स्थिति बना रहे हैं।
लेकिन सवाल ये है - अगर मुनीर सत्ता हथियाते हैं, तो क्या वो पाकिस्तान को बचा पाएंगे? या फिर ये देश और गहरे संकट में डूब जाएगा? और अगर शहबाज शरीफ सत्ता में बने रहते हैं, तो क्या वो जनता का भरोसा जीत पाएंगे? इन सवालों के जवाब तो वक्त ही देगा, लेकिन इतना तय है कि पाकिस्तान की सियासत में अभी बहुत ड्रामा बाकी है।
तो ये थी पाकिस्तान की सियासत की ताजा कहानी। आपको क्या लगता है - क्या आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की जोड़ी टूटेगी? क्या पाकिस्तान में फिर से तख्तापलट होगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
