नर्मदा तट का पांडवकालीन तीर्थ: विमलेश्वर-चंद्रेश्वर महादेव

A Pandava-era pilgrimage site on the banks of the Narmada: Vimaleshwar-Chandreshwar Mahadev
 
नर्मदा तट का पांडवकालीन तीर्थ: विमलेश्वर-चंद्रेश्वर महादेव

अर्पण जैन ‘अविचल’ — विनायक फीचर्स

मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की जीवंत धारा है। इसके दोनों तटों पर अनेक प्राचीन शिव मंदिर और तीर्थ स्थित हैं, जिनसे जुड़ी पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताएं आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। इन्हीं महत्वपूर्ण तीर्थों में विमलेश्वर-चंद्रेश्वर महादेव का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

नर्मदा के उत्तर तट पर निमाड़ क्षेत्र में स्थित यह प्राचीन तीर्थ मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में बड़वाह से करीब सात किलोमीटर दूर सनावद मार्ग पर बेलसर गांव में स्थित है। यहां विमलेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है, जबकि इसके समीप पहाड़ी पर चंद्रेश्वर महादेव का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

विमलेश्वर नाम का धार्मिक महत्व

‘विमलेश्वर’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—‘विमल’, जिसका अर्थ निर्मल अथवा पवित्र और ‘ईश्वर’, अर्थात भगवान। धार्मिक मान्यता के अनुसार विमलेश्वर ऐसे भगवान हैं जो स्वयं पवित्र हैं और अपने भक्तों को भी पवित्रता प्रदान करते हैं।विमलेश्वर तीर्थ का उल्लेख श्रीमद् नर्मदारहस्यम के 57वें अध्याय में मिलता है। इसके अलावा स्कंद पुराण के नर्मदा पुराण और वायु पुराण में भी इस तीर्थ का वर्णन बताया जाता है।

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पांडवों से जुड़ी है मान्यता

स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार विमलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग की स्थापना कुंती पुत्र भीम ने की थी। इसी कारण इस मंदिर को पांडवकालीन तीर्थ माना जाता है।विमलेश्वर मंदिर के निकट पहाड़ी पर स्थित चंद्रेश्वर महादेव मंदिर भी अपने धार्मिक और स्थापत्य महत्व के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र है। मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की गई है। यहां मौजूद करीब ढाई मन वजनी अष्टधातु का विशाल घंटा भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।मंदिर के बाहर द्वारपाल की प्रतिमा के साथ आसपास गुफाएं और जलकुंड भी मौजूद हैं, जो इस स्थान के प्राचीन स्वरूप और धार्मिक महत्व को और बढ़ाते हैं।

अहिल्याबाई के शासनकाल में हुआ जीर्णोद्धार

विमलेश्वर महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार का संबंध महारानी अहिल्याबाई होलकर के शासनकाल से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी काल में मंदिर का पुनरुद्धार कराया गया और पुजारी की नियुक्ति के साथ उनके जीवनयापन के लिए कृषि योग्य भूमि भी उपलब्ध कराई गई।

बेलसर गांव नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां नर्मदा परिक्रमा करने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं का भी निरंतर आगमन होता है। गांव में स्थित रेवा धाम आश्रम और बर्फानी आश्रम में परिक्रमावासियों के लिए ठहरने तथा भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था की जाती है। वहीं रामेश्वर धाम आश्रम में नर्मदा मंदिर भी स्थित है।

महाशिवरात्रि और पंचक्रोशी यात्रा के दौरान उमड़ती है भीड़

बेलसर के ग्रामीणों और ग्राम पंचायत की ओर से यहां दो प्रमुख वार्षिक धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। पहला आयोजन महाशिवरात्रि के अवसर पर होता है। इस दौरान विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।दूसरा प्रमुख आयोजन देवउठनी ग्यारस के बाद शुरू होने वाली पंचक्रोशी यात्रा से जुड़ा है। यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव विमलेश्वर तीर्थ होने के कारण इस अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

कैसे पहुंचें विमलेश्वर तीर्थ?

विमलेश्वर तीर्थ नर्मदा के सुंदर तट पर प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित है और प्रसिद्ध ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के निकट होने के कारण धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।निकटतम प्रमुख हवाई संपर्क इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा है। रेल मार्ग से खंडवा और इंदौर प्रमुख विकल्प हैं। सड़क मार्ग से बड़वाह पहुंचकर आगे स्थानीय साधनों अथवा निजी वाहन से बेलसर स्थित विमलेश्वर तीर्थ जाया जा सकता है।ओंकारेश्वर, खंडवा, खरगोन और इंदौर जैसे प्रमुख शहरों से सड़क परिवहन की सुविधा उपलब्ध होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए यहां पहुंचना अपेक्षाकृत आसान है।

आस्था, इतिहास और प्रकृति का संगम

विमलेश्वर-चंद्रेश्वर महादेव तीर्थ केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पौराणिक परंपरा, स्थानीय इतिहास और नर्मदा के प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है। पांडवों से जुड़ी मान्यता, पुराणों में वर्णित तीर्थ परंपरा और अहिल्याबाई होलकर के समय हुए जीर्णोद्धार ने इसकी महत्ता को और बढ़ाया है। महाशिवरात्रि का मेला और पंचक्रोशी यात्रा के दौरान उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस तीर्थ की लोकप्रियता को दर्शाती है। नर्मदा परिक्रमा करने वालों के लिए यहां के आश्रम सेवा और विश्राम का महत्वपूर्ण आधार हैं।

जो श्रद्धालु शांति, प्रकृति, इतिहास और शिवभक्ति को एक साथ अनुभव करना चाहते हैं, उनके लिए विमलेश्वर-चंद्रेश्वर महादेव तीर्थ एक विशेष आध्यात्मिक पड़ाव हो सकता है। नर्मदा तट पर स्थित यह प्राचीन धाम आज भी अपनी धार्मिक परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

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