देववन नक्षत्र वाटिका में रोपे गए विभिन्न प्रजातियों के पौधे; संस्थापक के. के. जनार्दन नांबियार ने बताया नवग्रह, राशि और 27 नक्षत्रों का प्राकृत संबंध

Plants of various species were planted in the Devvan Nakshatra Vatika; founder K. K. Janardhan Nambiar explained the natural connection between the Navagrahas, zodiac signs, and the 27 Nakshatras.
 
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लखनऊ, 08 जून 2026:

राजधानी लखनऊ स्थित देववन नक्षत्र वाटिका में एक विशेष पौधारोपण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह पूरा कार्यक्रम देववन नक्षत्र वाटिका के संस्थापक के. के. जनार्दन नांबियार के कुशल मार्गदर्शन और गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर भारी संख्या में पर्यावरण प्रेमियों और गणमान्य नागरिकों ने एकत्रित होकर विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया और समाज को पर्यावरण संरक्षण का एक मजबूत संदेश दिया।

त्रिवेणी पौधों का धार्मिक व पर्यावरणीय महत्व और नारद संहिता की विधि

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता के. के. जनार्दन नांबियार ने त्रिवेणी पौधों (पीपल, बरगद और नीम) के त्रिकोणीय धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला।

शास्त्रों का ज्ञान: श्री नांबियार ने प्राचीन शास्त्रों और 'नारद संहिता' के सूत्रों का हवाला देते हुए संगतों को वृक्षारोपण की सही विधि तथा उससे प्राप्त होने वाले आध्यात्मिक व भौतिक लाभों की गहरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार लगाया गया एक-एक पौधा मनुष्य के जीवन में यज्ञ के समान पुण्य लेकर आता है।

क्या है देववन नक्षत्र वाटिका की अवधारणा?

संस्थापक श्री नांबियार ने वाटिका की अनूठी अवधारणा को समझाते हुए बताया कि भारतीय ज्योतिष और सनातन परंपरा में नवग्रह, 12 राशियों और 27 नक्षत्रों का प्रकृति व वनस्पतियों के साथ एक अत्यंत गहरा और अविभाज्य संबंध माना गया है।

प्रत्येक नक्षत्र, राशि और ग्रह का प्रतिनिधित्व कोई न कोई विशेष वृक्ष या पौधा करता है। इन विशिष्ट पौधों का रोपण और संरक्षण न केवल हमारे स्थानीय पर्यावरण को संतुलित रखता है, बल्कि यह मानव समाज में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को भी जागृत करने का एक श्रेष्ठ माध्यम है।

थानाध्यक्ष टी. पी. वर्मा ने लगाया बेल का पौधा, गणमान्य रहे उपस्थित

पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के इस महाअभियान में प्रशासनिक अधिकारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया:

  • एसएचओ टी. पी. वर्मा ने कार्यक्रम में विशेष रूप से शिरकत करते हुए 'बेल' (बिल्वपत्र) का पौधा रोपित किया और उपस्थित लोगों से अपनी दैनिक जीवनशैली में प्रकृति को स्थान देने की अपील की।

  • इस दौरान तेज कुमार मिश्रा, रामपाल, प्रमोद, महेंद्र, सुशील और अंकुर सहित बड़ी संख्या में स्थानीय पर्यावरण प्रेमी और संभ्रांत नागरिक मौजूद रहे।

कार्यक्रम के समापन पर देववन नक्षत्र वाटिका में उपस्थित सभी नागरिकों ने इस मानसून सीजन में अधिक से अधिक संख्या में वृक्ष लगाने और उनकी पूर्ण विकसित होने तक बच्चों की तरह देखभाल करने का सामूहिक संकल्प लिया।

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