सुरक्षित मातृत्व का संकल्प: लखनऊ में 'आर्ट ऑफ बर्थिंग कॉन्क्लेव' संपन्न; सिजेरियन के बढ़ते चलन और सुरक्षित प्रसव पर विशेषज्ञों ने दिया जोर
सिजेरियन की बढ़ती दर चिंता का विषय: अपर मुख्य सचिव
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अमित कुमार घोष (अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उ.प्र. शासन) ने बढ़ते सिजेरियन प्रसव (C-Section) पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि प्रसव की दर 20-25% से बढ़कर अब 40-50% तक पहुँच गई है।
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प्रमुख कारण: एनीमिया, मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाएँ (High-Risk Pregnancy)।
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प्राथमिकता: उन्होंने स्पष्ट किया कि लक्ष्य प्रसव के प्रकार को चुनना नहीं, बल्कि प्रत्येक प्रसव को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना है, ताकि मातृ मृत्यु दर (MMR) और नवजात मृत्यु दर (NMR) में प्रभावी कमी लाई जा सके।
मिडवाइव्स और स्वास्थ्यकर्मियों का सशक्तिकरण
आयोजन अध्यक्ष और फॉग्सी की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार ने कहा कि यह कॉन्क्लेव विशेष रूप से मिडवाइव्स और फ्रंटलाइन वर्कस को सशक्त बनाने की एक पहल है। कौशल-आधारित प्रशिक्षण और वैश्विक अनुभवों के समन्वय से ही प्रसव की गुणवत्ता में सुधार संभव है। फॉग्सी के प्रेसिडेंट डॉ. भास्कर पाल ने कहा कि संस्था का उद्देश्य हर प्रसव को गरिमापूर्ण बनाना और हाई-रिस्क मामलों में जागरूकता बढ़ाना है।
व्यावहारिक प्रशिक्षण और वैश्विक मानक
आयोजन सचिव डॉ. सीमा मेहरोत्रा और डॉ. सुजाता देव ने बताया कि कॉन्क्लेव में 500 से अधिक नर्सिंग अधिकारियों और मातृ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया।
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सहयोग: इस आयोजन में UNICEF, UNFPA India, Jhpiego और Laerdal Global Health जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों का तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ।
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सेफ डिलीवरी ऐप: लाerdal Global Health द्वारा 'सेफ डिलीवरी ऐप' की जानकारी दी गई, जो स्वास्थ्यकर्मियों को वास्तविक समय (Real-time) में चिकित्सीय मार्गदर्शन प्रदान करता है।
वैज्ञानिक सत्रों के मुख्य बिंदु
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सम्मानजनक मातृत्व देखभाल (RMC): प्रसव के दौरान महिलाओं की गरिमा और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
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प्राकृतिक प्रसव (Natural Birth): कम जोखिम वाली महिलाओं के लिए वैकल्पिक प्रसव स्थितियों (Alternative Birth Positions) और गैर-औषधीय दर्द निवारण तकनीकों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।
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कौशल केंद्र (Skill Stations): प्रसवोत्तर रक्तस्राव (PPH) नियंत्रण, नवजात पुनर्जीवन (Newborn Resuscitation) और प्रसव प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति
उद्घाटन समारोह में डॉ. हेमा दिवाकर (पूर्व अध्यक्ष, फॉग्सी), डॉ. चंद्रावती (संस्थापक संरक्षक, लॉग्स), डॉ. मंजू शुक्ला, डॉ. दीपा प्रसाद और डॉ. संजय त्रिपाठी (झपाइगो) सहित डॉ. अनीता सिंह एवं डॉ. गायत्री सिंह जैसे गणमान्य चिकित्सा विशेषज्ञ उपस्थित रहे।


