PM Modi on Naxalism Independence Day Speech: 'हथियारों वाले नक्सल से ज्यादा खतरनाक है दिमागी नक्सलवाद', लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी का कड़ा संदेश

Independence Day 2026: 'Mental Naxalism is more dangerous than Naxalism with weapons', PM Modi's strong message from the ramparts of the Red Fort
 
PM Modi on Naxalism Independence Day Speech

PM Modi on Naxalism Independence Day Speech: 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए आंतरिक सुरक्षा और वैचारिक चुनौतियों पर खुलकर बात की। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक बेहद अहम मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज देश के सामने हथियारों वाले नक्सलवाद से भी बड़ा और गंभीर खतरा 'दिमागी नक्सलवाद' (Urban/Ideological Naxalism) है, जिससे देश को सतर्क रहने और बचाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी में भारत के विकास की राह में रोड़ा बनने वाली पुरानी चुनौतियों को जड़ से खत्म करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 21वीं सदी में भारत के लिए उन पुरानी चुनौतियों को समाप्त करना जरूरी है, जिन्होंने देश के विकास को लंबे समय तक प्रभावित किया। उन्होंने नक्सलवाद और माओवाद को ऐसी ही चुनौती बताते हुए कहा कि इसने बड़ी संख्या में युवाओं का भविष्य प्रभावित किया और अनेक परिवारों को अपने प्रियजनों को खोना पड़ा।

चार दशकों तक चुनौती बना रहा नक्सलवाद

पीएम मोदी ने कहा कि करीब चार दशकों तक नक्सलवाद ने भारत के कई हिस्सों को प्रभावित किया। उनके मुताबिक हिंसा और बंदूक के जरिए व्यवस्था को चुनौती देने से विकास की प्रक्रिया बाधित हुई और आम लोगों के जीवन पर इसका गंभीर असर पड़ा।उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा के दौरान 3,500 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने अपनी जान गंवाई। प्रधानमंत्री ने नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा का भी उल्लेख किया।

2014 से नक्सलवाद मुक्त भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में उनकी सरकार बनने के बाद देश को नक्सलवाद से मुक्त कराने का संकल्प लिया गया था। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में नक्सली और माओवादी हिंसा काफी कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है और इसे पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी नक्सल हिंसा का प्रभाव था, वहां अब विकास, विश्वास और प्रयास का वातावरण बन रहा है।

‘दिमागी नक्सल’ से क्या आशय?

प्रधानमंत्री के बयान में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल हथियारबंद हिंसा से आगे बढ़कर उस विचारधारा और मानसिकता के संदर्भ में किया गया, जिसे वे नक्सलवाद की चुनौती का वैचारिक पक्ष मानते हैं। उनके संदेश का आशय यह था कि केवल हथियारबंद समूहों के खिलाफ कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। ऐसी सोच और विचारधारा को भी चुनौती देना जरूरी है, जिसे सरकार नक्सलवाद को बढ़ावा देने वाला मानती है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का दावा

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन इलाकों में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, वहां अब विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने इसे नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में बदलते माहौल का संकेत बताया। उन्होंने साथ ही भारत की स्थिर राजनीतिक व्यवस्था, लोकतंत्र, न्याय व्यवस्था और संविधान को देश की ताकत बताया।

MSMEs को वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने की अपील

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने हाल में हुए व्यापार समझौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने देश के MSME सेक्टर से वैश्विक बाजार में विस्तार के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। कुल मिलाकर, लाल किले से प्रधानमंत्री का संदेश नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ उसके वैचारिक प्रभाव को समाप्त करने और प्रभावित क्षेत्रों में विकास को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।

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