पीएनबी बैंक घोटाला: 12 करोड़ से अधिक के फर्जी लोन मामले में लोन अप्रूवर अधिकारी गिरफ्तार
बुधवार को मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक महेश त्रिपाठी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर एक ही व्यक्ति और उससे जुड़े खातों के नाम पर करोड़ों रुपये के लोन स्वीकृत किए। जांच में लगभग 12 करोड़ 03 लाख 37 हजार रुपये के सरकारी धन के गबन की पुष्टि हुई है।
एसपी ने बताया कि पीएनबी सर्किल ऑफिस, अयोध्या द्वारा कराई गई विभागीय जांच में नहरबालागंज शाखा में गंभीर लोन अनियमितताएं पाई गई थीं। इसके बाद कोतवाली नगर थाने में मामला दर्ज कर पुलिस जांच शुरू की गई।
फर्जी एलआईसी पॉलिसी के जरिए हुआ लोन अप्रूवल
जांच में सामने आया कि बिना सक्षम अधिकारियों की अनुमति के फर्जी लोन खाते खोले गए और लोन की राशि कैश व बैंक ट्रांसफर के माध्यम से पीएसपी कंस्ट्रक्शंस से जुड़े लोगों तक पहुंचाई गई। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार अभियुक्त विनय शर्मा ने स्वीकार किया कि वह लोन अप्रूवर (लेवल एस-1) के पद पर कार्यरत था और बैंक के सॉफ्टवेयर में फर्जी एलआईसी पॉलिसी नंबर दर्ज कर लोन अप्रूवल की प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी करता था, जिसके बाद शाखा प्रबंधक द्वारा अंतिम स्वीकृति दी जाती थी।इस तरीके से करीब 46 सामान्य लोन खातों में 8 करोड़ रुपये से अधिक तथा 40 मुद्रा लोन खातों में लगभग 4 करोड़ रुपये का गबन किया गया।
पहले ही जेल जा चुके हैं तीन आरोपी
इस मामले में इससे पहले तत्कालीन शाखा प्रबंधक महेश त्रिपाठी, समरजीत सिंह और संतोष कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।बलरामपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बैंक घोटाले से जुड़े सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और गबन की गई धनराशि की रिकवरी के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं।
