पश्चिम बंगाल में बढ़ा सियासी तनाव: शुभेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या से मचा हड़कंप
जानकारी के मुताबिक, बुधवार शाम मध्यमग्राम के डोहरिया मोड़ इलाके में चंद्रनाथ रथ अपनी कार में बैठे हुए थे और घर के नजदीक मौजूद थे। इसी दौरान बाइक सवार कुछ अज्ञात हमलावर वहां पहुंचे और उनकी गाड़ी को रोककर बेहद करीब से फायरिंग कर दी। बताया जा रहा है कि तीन राउंड गोलियां चलाई गईं, जिनमें एक गोली उनके सीने में लगी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हमले में एक सुरक्षा गार्ड के घायल होने की भी खबर है।
इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। चंद्रनाथ रथ लंबे समय से शुभेंदु अधिकारी के साथ जुड़े हुए थे और बीजेपी के संगठनात्मक व चुनावी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि राज्य में बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
घटना की जानकारी मिलते ही शुभेंदु अधिकारी अस्पताल पहुंचे और इसे “पूर्व नियोजित हत्या” बताया। बीजेपी नेताओं ने सीधे तौर पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में राजनीतिक विरोधियों को डराने की कोशिश की जा रही है। बीजेपी नेता कीया घोष ने दावा किया कि चंद्रनाथ रथ ने पार्टी के चुनावी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इसी कारण उन्हें निशाना बनाया गया।
वहीं बीजेपी नेता अर्जुन सिंह ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि चुनावों के बाद राज्य में भय का माहौल बनाया जा रहा है ताकि विपक्षी कार्यकर्ता दबाव में आ जाएं।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इस घटना की निंदा करते हुए किसी भी प्रकार की राजनीतिक हिंसा को गलत बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके कई कार्यकर्ता भी हिंसा का शिकार हुए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। TMC ने इस प्रकरण की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग भी उठाई है।
फिलहाल पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और हमलावरों की पहचान करने की कोशिश जारी है। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा और राजनीतिक टकराव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सभी की नजर जांच एजेंसियों पर टिकी है कि आखिर इस हत्या के पीछे की असली वजह क्या थी और दोषियों तक पुलिस कब पहुंच पाएगी। लेकिन इतना तय है कि इस वारदात ने बंगाल की राजनीति में डर और असुरक्षा की भावना को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
