कड़ाके की ठंड में खुले आसमान तले सोने को मजबूर गरीब , मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद ऐशबाग रेलवे पुल पर बदहाल हालात

ऐशबाग रेलवे पुल थाना नाका हिण्डोला और थाना बाजारखाला—दो थानों की सीमा के बीच स्थित है, बावजूद इसके यहां की बदहाल स्थिति पर किसी जिम्मेदार की नजर नहीं पड़ रही। न रैन बसेरों की व्यवस्था दिखाई देती है और न ही प्रशासनिक सक्रियता। ठंड से बचाव के लिए न कंबल, न अलाव और न ही आश्रय की कोई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं संवेदनशील माने जाते हैं, लेकिन उनके आदेशों को लागू कराने वाले जिम्मेदार अधिकारी संवेदनहीन नजर आ रहे हैं। खुले में सो रहे ये गरीब कौन हैं, कहां से आते हैं और क्यों इस भीषण ठंड में पुल के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं—इसका कोई रिकॉर्ड न तो पुलिस प्रशासन के पास है और न ही नगर निगम के पास।

वहीं, कई सामाजिक संगठन जो अक्सर समाचार पत्रों में फोटो खिंचवाने और दान-प्रचार तक सीमित रहते हैं, वे भी इन बेसहारा लोगों की सुध लेने नहीं पहुंचते। नतीजतन गरीब, बेसहारा और मजबूर लोग इस कड़ाके की ठंड में भी खुले में सोने को विवश हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज की सामूहिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर चिंतन की मांग करती है।
